Delhi: राजधानी दिल्ली के पर्यावरण को बचाने और हरियाली बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। उपराज्यपाल (LG) टी.एस. संधू ने 2 जून, 2026 को दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड (DRMB) के पुनर्गठन को अपनी मंजूरी दे दी है। यह पूरा फ
Delhi: राजधानी दिल्ली के पर्यावरण को बचाने और हरियाली बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। उपराज्यपाल (LG) टी.एस. संधू ने 2 जून, 2026 को दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड (DRMB) के पुनर्गठन को अपनी मंजूरी दे दी है। यह पूरा फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के नियमों के तहत लिया गया है ताकि दिल्ली के रिज क्षेत्र की बेहतर निगरानी हो सके।
रिज मैनेजमेंट बोर्ड के पुनर्गठन की मुख्य बातें क्या हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को निर्देश दिया था कि DRMB को वैधानिक शक्तियों के साथ दोबारा बनाया जाए। इसके बाद 1 दिसंबर, 2025 को एक अधिसूचना जारी हुई थी। अब इस नए बदलाव का मकसद रिज क्षेत्र में अतिक्रमण को रोकना, नए पेड़ लगाना और पर्यावरण की सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाना है। इसके लिए एक स्थायी समिति भी बनाई जाएगी, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) का एक सदस्य करेगा।
बोर्ड में कौन-कौन शामिल रहेंगे?
पुनर्गठित बोर्ड में कई महत्वपूर्ण अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल होंगे ताकि समन्वय बेहतर रहे। बोर्ड की अध्यक्षता दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव करेंगे। इसमें DDA के उपाध्यक्ष, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और आवास मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, MCD आयुक्त, NDMC अध्यक्ष और CPWD के महानिदेशक शामिल रहेंगे। साथ ही दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और राजस्व व पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव भी हिस्सा होंगे। सदस्य सचिव के तौर पर दिल्ली सरकार के प्रधान मुख्य वन संरक्षक को नियुक्त किया गया है।
| पद/संस्था |
नाम/प्रतिनिधि |
| विशेषज्ञ सदस्य (CEC) |
चंद्र प्रकाश गोयल |
| CEO, सेंटर फॉर सस्टेनेबल ग्रीन इकोनॉमी |
अरविंद माधव सिंह |
अनुसंधान एवं संचार निदेशक, संकल्प फाउंडेशन |
डॉ. मालविका कौल |
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड (DRMB) के पुनर्गठन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य दिल्ली के रिज क्षेत्र के संरक्षण, निगरानी और प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है। साथ ही यह अतिक्रमण हटाने और वनीकरण की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखेगा।
यह फैसला किस कानूनी आधार पर लिया गया है?
यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के ‘टी.एन. गोदावरमन थिरुमुलपाद बनाम भारत संघ’ मामले के निर्देशों और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 के प्रावधानों के तहत लिया गया है।