Delhi : राजधानी दिल्ली के लोगों को अब कूड़े के बड़े-बड़े पहाड़ों से छुटकारा मिलने वाला है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उनके ऑफिस ने जानकारी दी है कि शहर के लैंडफिल साइट्स को तेजी से साफ किया जा रहा है। बायोमाइनिंग का काम
Delhi : राजधानी दिल्ली के लोगों को अब कूड़े के बड़े-बड़े पहाड़ों से छुटकारा मिलने वाला है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उनके ऑफिस ने जानकारी दी है कि शहर के लैंडफिल साइट्स को तेजी से साफ किया जा रहा है। बायोमाइनिंग का काम अब 24 घंटे मशीनों के जरिए मिशन मोड में चल रहा है, जिससे कूड़े के ढेर लगभग आधे रह गए हैं।
लैंडफिल साइट्स कब तक होंगे पूरी तरह साफ
दिल्ली सरकार ने अलग-अलग लैंडफिल साइट्स के लिए समय सीमा तय की है ताकि शहर को कचरा मुक्त बनाया जा सके। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विजन 2047 के तहत 2026 के अंत तक सभी लैंडफिल साइट्स को समतल करने का लक्ष्य रखा है। अलग-अलग साइट्स की डेडलाइन इस प्रकार है:
- Okhla लैंडफिल: जुलाई 2026 तक
- Bhalswa लैंडफिल: दिसंबर 2026 तक
- Ghazipur लैंडफिल: दिसंबर 2027 तक
कचरा निस्तारण के लिए क्या कदम उठाए गए
कूड़े के पहाड़ों को खत्म करने के लिए दिल्ली सरकार और MCD ने अपनी क्षमता बढ़ाई है। पहले कचरा प्रोसेस करने की क्षमता 7,500 metric tonnes प्रतिदिन थी, जिसे बढ़ाकर अब 35,000 metric tonnes प्रतिदिन कर दिया गया है। बायोमाइनिंग की क्षमता को भी 15,000 TPD से बढ़ाकर 25,000 TPD किया गया है ताकि पुराने कचरे को जल्दी हटाया जा सके।
नए नियम और भविष्य की योजनाएं
1 अप्रैल 2026 से ‘Solid Waste Management Rules 2026’ लागू हो चुके हैं, जिसके तहत कचरे का प्रबंधन पर्यावरण के अनुकूल तरीके से करना जरूरी है। सरकार अब Waste-to-Energy प्रोजेक्ट्स पर जोर दे रही है ताकि नया कचरा लैंडफिल साइट्स पर न पहुंचे। इसके लिए 6,000 metric tonnes प्रतिदिन ताजे कचरे को खाद में बदलने के लिए नए प्लांट लगाने के टेंडर भी निकाले गए हैं।