Delhi: महंगाई के समय में मजदूरों के लिए सही वेतन मिलना बहुत जरूरी है। देश के अलग-अलग राज्यों में न्यूनतम मजदूरी की दरें अलग-अलग तय की गई हैं। दिल्ली, कर्नाटक और महाराष्ट्र उन राज्यों में सबसे आगे हैं जहां मजदूरों को बेहत
Delhi: महंगाई के समय में मजदूरों के लिए सही वेतन मिलना बहुत जरूरी है। देश के अलग-अलग राज्यों में न्यूनतम मजदूरी की दरें अलग-अलग तय की गई हैं। दिल्ली, कर्नाटक और महाराष्ट्र उन राज्यों में सबसे आगे हैं जहां मजदूरों को बेहतर न्यूनतम मजदूरी मिल रही है। सरकारें समय-समय पर महंगाई को देखते हुए इन दरों में बदलाव करती हैं ताकि मजदूरों का गुजारा हो सके।
प्रमुख राज्यों में कितनी है न्यूनतम मजदूरी की दरें
दिल्ली में अकुशल श्रमिकों के लिए देश की सबसे अधिक न्यूनतम मजदूरी तय की गई है। वहीं हरियाणा सरकार ने भी हाल ही में वेतन में बड़ी बढ़ोतरी की है। अलग-अलग राज्यों की ताज़ा दरें नीचे दी गई टेबल में देख सकते हैं:
| राज्य (अप्रैल 2026) |
अकुशल (Unskilled) |
अर्ध-कुशल (Semi-skilled) |
कुशल (Skilled) |
| Delhi |
₹19,846/माह |
₹21,813/माह |
₹23,905/माह |
| Karnataka |
₹17,295/माह |
₹18,570/माह |
₹19,972/माह |
| Maharashtra (Zone 1) |
₹13,921/माह |
₹14,756/माह |
₹15,532/माह |
| UP (नोएडा/गाजियाबाद) |
₹13,690/माह |
₹15,059/माह |
₹16,868/माह |
वेतन तय करने के नियम और हालिया बदलाव क्या हैं
भारत में न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के तहत वेतन तय होता है। राज्य सरकारें साल में दो बार, आमतौर पर 1 अप्रैल और 1 अक्टूबर को दरों की घोषणा करती हैं। इसमें मूल वेतन के साथ महंगाई भत्ता (VDA) भी जुड़ा होता है। कोड ऑन वेजेस, 2019 के जरिए अब ‘फ्लोर वेज’ का नियम आया है, जिससे कोई भी राज्य एक तय सीमा से कम मजदूरी नहीं दे सकता।
नोएडा और हरियाणा में वेतन को लेकर क्या हुआ
नोएडा, फरीदाबाद और गुड़गांव-मानेसर जैसे इलाकों में न्यूनतम मजदूरी को लेकर काफी विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 1 अप्रैल, 2026 से न्यूनतम मजदूरी में 21% तक की वृद्धि की है। वहीं हरियाणा सरकार ने 13 अप्रैल, 2026 को वेतन में 35% की बड़ी बढ़ोतरी की, जिससे यह मजदूरों के लिए एक पसंदीदा राज्य बन गया है। नागालैंड जैसे राज्यों में अभी भी अकुशल मजदूरों को मात्र ₹5,280 प्रति माह मिल रहे हैं।