Delhi में कांवड़ यात्रा 2026 को लेकर ट्रैफिक एडवाइजरी जारी, 29 जुलाई से भारी वाहनों की एंट्री बंद

Delhi: राजधानी दिल्ली में कांवड़ यात्रा 2026 को लेकर ट्रैफिक पुलिस ने विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। यह यात्रा 30 जुलाई से 11 अगस्त तक चलेगी, जिसके कारण शहर के कई रास्तों पर ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया गया है। आम जनता

Delhi: राजधानी दिल्ली में कांवड़ यात्रा 2026 को लेकर ट्रैफिक पुलिस ने विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। यह यात्रा 30 जुलाई से 11 अगस्त तक चलेगी, जिसके कारण शहर के कई रास्तों पर ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया गया है। आम जनता और वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे रूट मैप देखकर ही घर से निकलें ताकि जाम में फंसने से बचा जा सके।

ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, 29 जुलाई से ही दिल्ली में भारी वाहनों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है। GT Road, वजीराबाद रोड और विकास मार्ग जैसे मुख्य रास्तों पर भारी वाहनों (HTVs) का आना-जाना प्रतिबंधित है, हालांकि सिटी बसों को इससे छूट दी गई है। इन वाहनों को अब NH-9 और NH-44 के जरिए डायवर्ट किया जाएगा। विशेष रूप से 9 अगस्त की सुबह 7 बजे से 12 अगस्त की रात 8 बजे तक अप्सरा बॉर्डर और यमुना ब्रिज के बीच GT Road को आम ट्रैफिक के लिए पूरी तरह बंद रखा जाएगा।

दिल्ली सरकार ने शिवभक्तों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कैबिनेट मीटिंग में कांवड़ शिविरों के लिए अनुदान राशि को बढ़ाकर 15 लाख रुपये तक कर दिया है। यह मदद उन बड़े शिविरों को मिलेगी जो 20,000 वर्ग फुट से ज्यादा जगह में होंगे और 6 से 12 दिनों तक चलेंगे। साथ ही, कांवड़ कमेटियों को 1,200 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की सुविधा जारी रहेगी। प्रशासन शिविरों में साफ-सफाई, मेडिकल केयर, पीने का पानी और मोबाइल टॉयलेट की व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।

सुरक्षा के लिहाज से दिल्ली पुलिस ने रणनीतिक जगहों पर जवान तैनात किए हैं और ड्रोन व CCTV कैमरों से निगरानी की जा रही है। दिल्ली-मेरुथ एक्सप्रेसवे 7 अगस्त से 12 अगस्त तक बंद रहेगा, सिवाय डाक कांवड़ियों के। वहीं, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर कांवड़ियों और कांवड़ वाहनों के चलने की मनाही है। हरिद्वार में भी NH-58 के नरसाइन और रुड़की वाले हिस्से में ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है ताकि श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।

कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए कुछ कड़े नियम भी तय हैं। मान्यता के अनुसार कांवड़ को जमीन पर नहीं रखा जाता और श्रद्धालु नंगे पैर चलते हैं। यात्रा के दौरान पूरी तरह शाकाहारी भोजन, ब्रह्मचर्य और सत्य बोलने का पालन करना होता है। साथ ही चमड़े के बेल्ट, जूते और वॉलेट का उपयोग न करने की सलाह दी गई है। सभी श्रद्धालु 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करेंगे।