Delhi में नाबालिगों के बीच बढ़ रही हिंसा, 150 रुपये के विवाद में युवक की हत्या; समाज के लिए बड़ी चेतावनी

Delhi: राजधानी दिल्ली में किशोरों और नाबालिगों का हिंसक होना एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। हाल ही में तिलक नगर में महज 150 रुपये के विवाद को लेकर तीन नाबालिगों ने मिलकर एक व्यक्ति की चाकू मारकर हत्या कर दी। यह मामला साम

Delhi: राजधानी दिल्ली में किशोरों और नाबालिगों का हिंसक होना एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। हाल ही में तिलक नगर में महज 150 रुपये के विवाद को लेकर तीन नाबालिगों ने मिलकर एक व्यक्ति की चाकू मारकर हत्या कर दी। यह मामला सामने आने के बाद अब समाज में बच्चों के गिरते नैतिक मूल्यों और उनके बीच बढ़ती आक्रामकता पर गंभीर चिंता जताई जा रही है।

दिल्ली पुलिस ने 24 जून 2026 को तिलक नगर मामले में तीनों नाबालिगों को हिरासत में लिया। इसके अलावा, 25 जून को एक 11 साल की बच्ची के अपहरण और हत्या के आरोप में एक कैब चालक को गिरफ्तार किया गया, जिस पर बिहार में भी कई आपराधिक मामले दर्ज थे। वहीं, 23 जून को सब्जी मंडी इलाके के महिला थाने में एक 14 साल की किशोरी ने अपने पड़ोसी पर दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाते हुए पहली FIR दर्ज कराई।

NCRB के 2024 के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में किशोर अपराध की दर अन्य महानगरों के मुकाबले सबसे ज्यादा है। यहाँ प्रति एक लाख नाबालिग आबादी पर करीब 42 मामले दर्ज हुए। साल 2024 में कुल 2,300 से अधिक किशोर अपराध के मामले सामने आए, जिनमें हत्या, चाकूबाजी और गैंग कल्चर जैसे गंभीर अपराध शामिल थे। पुलिस के मुताबिक, अब नाबालिग खुद गैंग बना रहे हैं और बड़े अपराधियों के साथ मिलकर उत्तर-पूर्वी और दक्षिण दिल्ली जैसे इलाकों में वारदातें कर रहे हैं।

विवरण आंकड़े (2024)
कुल किशोर अपराध मामले 2,300 से अधिक
पकड़े गए किशोरों की संख्या 3,270
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ मामले 134
पॉक्सो (POCSO) एक्ट के मामले 132
किशोर अपराध दर (प्रति लाख आबादी) 42
शिक्षा का स्तर (पकड़े गए किशोर) प्राथमिक से मैट्रिक तक (1,672 बच्चे)

दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि अपराधी अब ड्रग्स और हथियार तस्करी जैसे कामों के लिए बच्चों का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए नाबालिगों की आयु सीमा पर दोबारा सोचने की जरूरत है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (DCPCR) के खाली पदों को जल्द भरने का आदेश दिया था।

विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया का गलत असर, नशीले पदार्थों की लत और परिवार में बातचीत की कमी बच्चों को इस रास्ते पर ले जा रही है। गैंग्स जानबूझकर स्कूल छोड़ने वाले बच्चों को पैसे और ड्रग्स का लालच देते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि नाबालिगों को कानूनी तौर पर कम सजा मिलती है। मनोवैज्ञानिकों ने माता-पिता को सलाह दी है कि वे बच्चों के व्यवहार पर नजर रखें और उनके द्वारा देखे जाने वाले हिंसक वीडियो और सोशल मीडिया कंटेंट की निगरानी करें।