Delhi: दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट में तैनात डीएलएसए सचिव जज अमन कुमार शर्मा की आत्महत्या के मामले में बड़ा मोड़ आया है। दिल्ली पुलिस ने उनकी पत्नी और साली के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और साजिश रचने का मामला दर्ज किया
Delhi: दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट में तैनात डीएलएसए सचिव जज अमन कुमार शर्मा की आत्महत्या के मामले में बड़ा मोड़ आया है। दिल्ली पुलिस ने उनकी पत्नी और साली के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और साजिश रचने का मामला दर्ज किया है। इस घटना के बाद वकीलों के संगठन ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है और न्यायिक अधिकारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर चिंता जताई है।
जज अमन शर्मा की मौत और FIR की मुख्य बातें
30 साल के जज अमन कुमार शर्मा ने 2 मई 2026 को ग्रीन पार्क स्थित अपने घर पर फांसी लगाकर जान दे दी थी। उनके पिता प्रेम प्रकाश शर्मा की शिकायत पर 3 मई को पुलिस ने FIR दर्ज की। इसमें अमन की पत्नी स्वाति मलिक (जो खुद एक न्यायिक अधिकारी हैं) और उनकी चचेरी बहन निधि मलिक (IAS) पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 और 612 के तहत केस दर्ज किया गया है।
पिता के आरोप और पुलिस की कार्रवाई
अमन के पिता ने बताया कि उनका बेटा वैवाहिक समस्याओं से बहुत परेशान था और पत्नी अक्सर उनका अपमान करती थी। आत्महत्या से दो दिन पहले अमन ने पिता को फोन कर कहा था कि वह अब थक चुके हैं और उनके लिए जीना मुश्किल हो गया है। पुलिस ने जांच के लिए जज अमन और उनकी पत्नी के सभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त कर लिए हैं और आगे की कार्रवाई के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से अनुमति मांगी है।
वकीलों के संगठन ने क्या मांग की है
फर्स्ट जेनरेशन लॉयर्स एसोसिएशन ने 6 मई 2026 को इस मामले में हस्तक्षेप किया। संगठन का आरोप है कि पत्नी के उत्पीड़न की वजह से ही जज ने यह कदम उठाया। उन्होंने सरकार से मांग की है कि न्यायिक अधिकारियों के मानसिक स्वास्थ्य की जांच के लिए एक विशेष मेडिकल बोर्ड और समिति बनाई जाए ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
जज अमन शर्मा के खिलाफ FIR किन धाराओं में दर्ज हुई है
जज अमन शर्मा की पत्नी और साली के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 और 612 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने और साजिश रचने का मामला दर्ज किया गया है।
वकीलों के संगठन ने इस मामले में क्या मांग की है
फर्स्ट जेनरेशन लॉयर्स एसोसिएशन ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है और साथ ही न्यायिक अधिकारियों के मानसिक स्वास्थ्य के मूल्यांकन के लिए एक मेडिकल बोर्ड बनाने का आग्रह किया है।