Delhi के जंतर-मंतर हिंसा में पैलेट गन इस्तेमाल का आरोप, दिल्ली पुलिस ने किया इनकार, CRPF ने शुरू की जांच
Delhi: राजधानी के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई 2026 को छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा अब एक बड़े विवाद में बदल गई है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया
Delhi: राजधानी के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई 2026 को छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा अब एक बड़े विवाद में बदल गई है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई लोग घायल हुए। इस मामले में अब कई स्तरों पर जांच चल रही है और गृह मंत्रालय ने इस पूरे घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण मांगा है।
दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन के इस्तेमाल की बात को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। पुलिस का कहना है कि उनके पास ऐसे हथियार नहीं हैं और न ही इनका उपयोग किया गया। 25 जुलाई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जारी किए और दावा किया कि प्रदर्शन में किसी की मौत नहीं हुई। साथ ही, फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) के जरिए 2500 से ज्यादा आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की पहचान की गई है जो इस प्रदर्शन का हिस्सा थे।
दूसरी तरफ, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। सीआरपीएफ (CRPF) ने अपने जवानों द्वारा अधिक बल प्रयोग और पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों की आंतरिक जांच शुरू कर दी है। लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक घायल छात्र साहिल के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की और दावा किया कि पैलेट गन के छर्रे की वजह से छात्र की एक आंख की रोशनी जाने का खतरा है। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रधानमंत्री से माफी की मांग की है।
मेडिकल रिपोर्ट (MLC) में भी कुछ घायलों को गनशॉट जैसी चोटें मिलने की बात सामने आई है। इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर सभी सीसीटीवी फुटेज और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आदेश दिया है।
पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर नियम काफी सख्त हैं। SOP के मुताबिक, इनका उपयोग केवल तब किया जाता है जब जवानों की जान को गंभीर खतरा हो और पानी की बौछार या आंसू गैस जैसे उपाय नाकाम हो जाएं। इन्हें हमेशा कमर के नीचे निशाना साधकर चलाने की सलाह दी जाती है। हालांकि, 25 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार के साथ सहमति बनने के बाद अपना आंदोलन समाप्त कर दिया है, लेकिन जांच अब भी जारी है।