Delhi के जंतर मंतर इलाके में इंटरनेट बंद करने के खिलाफ याचिका वापस, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हटा प्रतिबंध

Delhi: राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर इलाके में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को बंद किए जाने के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में दायर एक याचिका वापस ले ली गई है। यह मामला तब शुरू हुआ था जब गृह मंत्रालय ने सुरक्षा कारणों से कई दिनों तक इ

Delhi: राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर इलाके में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को बंद किए जाने के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में दायर एक याचिका वापस ले ली गई है। यह मामला तब शुरू हुआ था जब गृह मंत्रालय ने सुरक्षा कारणों से कई दिनों तक इंटरनेट सेवाओं को रोकने के आदेश दिए थे। अब विरोध प्रदर्शन खत्म होने और इंटरनेट बहाल होने के बाद याचिकाकर्ता ने अपना केस वापस ले लिया है।

दरअसल, Cockroach Janta Party (CJP) द्वारा NEET परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ 20 जून से विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था। इस प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 17, 20, 22 और 23 जुलाई को दिल्ली के कुछ हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट बंद करने के आदेश जारी किए थे। सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर, इंडिया (SFLC.In) ने इन आदेशों को असंवैधानिक बताते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

SFLC.In ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि इंटरनेट बंद करना लोगों की अभिव्यक्ति की आजादी और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया था कि सरकार ने बिना किसी ठोस वजह के सिर्फ ‘सार्वजनिक आपातकाल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर इंटरनेट बंद किया। हालांकि, 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने अपना विरोध प्रदर्शन खत्म कर दिया। इसके तुरंत बाद इलाके में इंटरनेट सेवाएं फिर से शुरू कर दी गईं।

सोमवार, 27 जुलाई 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच के सामने वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंसाल्वेस ने यह याचिका वापस ली। गृह मंत्रालय ने इंटरनेट बंद करने के लिए टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023 की धारा 20(2)(b) और 2024 के नियमों का सहारा लिया था।