Delhi में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग न कराने पर लगेगा जुर्माना, बिजली बिल में जुड़ सकता है पेनल्टी का पैसा
Delhi: राजधानी में गिरते भूजल स्तर को देखते हुए Delhi Jal Board (DJB) अब सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। शहर में पानी की किल्लत बढ़ रही है, लेकिन लोग बारिश के पानी को सहेजने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। ऐसे में अब उन प
Delhi: राजधानी में गिरते भूजल स्तर को देखते हुए Delhi Jal Board (DJB) अब सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। शहर में पानी की किल्लत बढ़ रही है, लेकिन लोग बारिश के पानी को सहेजने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। ऐसे में अब उन प्रॉपर्टी मालिकों पर जुर्माना लगाया जा सकता है जिन्होंने अपने यहां रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाया है।
दिल्ली जल बोर्ड ने इसके लिए एक जागरूकता अभियान शुरू किया है। अगर इसके बाद भी लोगों का रवैया नहीं बदला, तो जुर्माने की रकम सीधे बिजली के बिल में जोड़कर वसूली जा सकती है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक जॉइंट कमेटी बनाई गई है, जिसमें DJB के साथ DPCC, MCD और Central Ground Water Authority (CGWA) शामिल हैं। यह कमेटी खासकर बड़ी रिहायशी सोसायटियों और कमर्शियल इमारतों की जांच करेगी।
नियमों के मुताबिक, दिल्ली में 100 वर्ग मीटर या उससे ज्यादा बड़े सभी प्लॉटों के लिए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य है। यह नियम साल 2001 से लागू है, जिसे 2019 में और कड़ा किया गया था। जो लोग इस नियम का पालन कर रहे हैं, उन्हें पानी के बिल में 10% की छूट मिलती है। अगर वहां वेस्ट वॉटर रिसाइक्लिंग सिस्टम भी लगा है, तो यह छूट बढ़कर 15% तक हो सकती है।
नियमों का पालन न करने वालों के लिए भारी जुर्माने का प्रस्ताव है। 100 से 500 वर्ग मीटर के प्लॉट पर 50,000 रुपये और 5,000 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर 5 लाख रुपये या उससे ज्यादा का जुर्माना लग सकता है। कमर्शियल बिल्डिंग्स के लिए यह जुर्माना 50% और ज्यादा होगा। इसके अलावा, बार-बार गलती करने वालों का पानी का कनेक्शन भी काटा जा सकता है।
दिल्ली के जल मंत्री Parvesh Verma ने साफ किया है कि सरकारी दफ्तरों में भी इसे समय सीमा के अंदर लागू करना होगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि लापरवाही बरतने वाले सरकारी संस्थानों की पानी की सप्लाई 10% तक कम की जा सकती है। अगस्त 2025 से लागू नई गाइडलाइंस के अनुसार, अब हार्वेस्टिंग पिट्स को नालों से दूर बनाना होगा ताकि पानी गंदा न हो।
वर्तमान स्थिति यह है कि दिल्ली की 9,148 सरकारी इमारतों में से 7,596 में यह सिस्टम लग चुका है। बाकी इमारतों के लिए 30 जून 2026 तक की डेडलाइन तय की गई है। DJB अब 500 नए सिस्टम लगाने और 1,000 पुराने खराब सिस्टम को ठीक करने का काम कर रहा है। साथ ही, जमीन के नीचे पानी के स्तर को मापने के लिए 47 नए डिवाइस भी लगाए जा रहे हैं।