Delhi: केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार में तैनात वरिष्ठ IAS अधिकारी Padma Jaiswal को नौकरी से हटा दिया है। उन पर भ्रष्टाचार और पैसों की हेराफेरी के गंभीर आरोप लगे थे। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद गृह मंत्रालय ने उन्हें
Delhi: केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार में तैनात वरिष्ठ IAS अधिकारी Padma Jaiswal को नौकरी से हटा दिया है। उन पर भ्रष्टाचार और पैसों की हेराफेरी के गंभीर आरोप लगे थे। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद गृह मंत्रालय ने उन्हें सेवा से हटाने का आदेश जारी किया है।
Padma Jaiswal को क्यों हटाया गया और मामला क्या है?
यह पूरा मामला साल 2007-2008 का है जब Padma Jaiswal अरुणाचल प्रदेश के West Kameng जिले में डिप्टी कमिश्नर थीं। वहां के स्थानीय लोगों ने फरवरी 2008 में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत के बाद अप्रैल 2008 में उन्हें सस्पेंड किया गया था, हालांकि अक्टूबर 2010 में यह सस्पेंशन हटा लिया गया था। इसके बाद 2009 और 2010 में उन्हें चार्ज मेमो दिए गए थे।
कोर्ट का फैसला और बर्खास्तगी की प्रक्रिया
इस मामले में काफी समय तक कानूनी लड़ाई चली। पहले Central Administrative Tribunal (CAT) ने गृह मंत्रालय की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी, लेकिन 1 अप्रैल 2026 को Delhi High Court ने केंद्र सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने CAT के फैसले को पलट दिया और अनुशासनात्मक कार्रवाई को आगे बढ़ाने की अनुमति दी। इसके बाद UPSC और CVC से सलाह ली गई और अंत में राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद उन्हें सेवा से निकाल दिया गया।
अधिकारी का क्या कहना है और वर्तमान स्थिति क्या है?
Padma Jaiswal 2003 बैच की AGMUT कैडर की अधिकारी हैं और फिलहाल दिल्ली सरकार के Administrative Reforms Department में Special Secretary के पद पर तैनात थीं। जब उनसे इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी किसी भी कार्रवाई या बर्खास्तगी के आदेश की जानकारी नहीं है। एक serving IAS अधिकारी के खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई होना काफी दुर्लभ माना जा रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
IAS अधिकारी Padma Jaiswal पर क्या आरोप थे?
उन पर 2007-2008 के दौरान अरुणाचल प्रदेश के West Kameng जिले में डिप्टी कमिश्नर रहते हुए भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे थे।
बर्खास्तगी का आदेश कब और किसने जारी किया?
बर्खास्तगी का आदेश मई 2026 के दूसरे हफ्ते (12-13 मई) में गृह मंत्रालय द्वारा जारी किया गया, जिसे राष्ट्रपति भारत की अंतिम मंजूरी मिली थी।