Delhi में आवारा कुत्तों के आतंक पर हाईकोर्ट सख्त, MCD और दिल्ली सरकार से मांगा पूरा ब्यौरा

Delhi: दिल्ली में आवारा कुत्तों के बढ़ते मामलों और लोगों को होने वाली परेशानी को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने खुद संज्ञान लेकर एक PIL दर्ज की है। कोर्ट अब इस बात की निगरानी करेगा कि सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मैने

Delhi: दिल्ली में आवारा कुत्तों के बढ़ते मामलों और लोगों को होने वाली परेशानी को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने खुद संज्ञान लेकर एक PIL दर्ज की है। कोर्ट अब इस बात की निगरानी करेगा कि सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मैनेजमेंट को लेकर जो निर्देश दिए थे, उन्हें दिल्ली में सही से लागू किया जा रहा है या नहीं।

जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने पाया कि आवारा कुत्तों की समस्या इतनी बढ़ गई है कि हाईकोर्ट के परिसर में भी कई कुत्ते घूमते नजर आते हैं। जस्टिस मेहता ने मौखिक तौर पर कहा कि आम आदमी कुत्तों के काटने की घटनाओं से बहुत परेशान है और अब इस पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

कोर्ट ने दिल्ली सरकार और नगर निगम (MCD) को नोटिस जारी कर 31 जुलाई 2026 तक एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट जमा करने को कहा है। यह रिपोर्ट अगली सुनवाई से एक दिन पहले दाखिल करनी होगी, जिसकी अगली तारीख 3 अगस्त 2026 तय की गई है। इसके अलावा केंद्र सरकार और NHAI को भी जवाब देने के लिए नोटिस भेजा गया है।

सुप्रीम कोर्ट के उन नियमों को लागू करने पर जोर दिया गया है जिनमें स्कूलों, अस्पतालों, बस डिपो और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने की बात कही गई है। नियमों के मुताबिक, जिन कुत्तों को इन जगहों से उठाया जाएगा, उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद वापस उसी जगह नहीं छोड़ा जाएगा। साथ ही, सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों को खाना खिलाने के लिए अलग से फीडिंग जोन बनाने और गंभीर रूप से आक्रामक या रेबीज ग्रस्त कुत्तों को कानून के तहत हटाने की अनुमति देने जैसे निर्देश भी शामिल हैं। कोर्ट ने साफ किया है कि वह पशु कल्याण और जन सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना चाहता है।