Delhi High Court में शनिवार की सुनवाई पर लगी रोक, बार एसोसिएशन के विरोध के बाद बदला फैसला
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने महीने के पहले और तीसरे शनिवार को होने वाली अदालती सुनवाई को फिलहाल रोक दिया है। यह फैसला दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) के कड़े विरोध और इस पूरे मामले की समीक्षा के लिए एक कमेटी बनाने के
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने महीने के पहले और तीसरे शनिवार को होने वाली अदालती सुनवाई को फिलहाल रोक दिया है। यह फैसला दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) के कड़े विरोध और इस पूरे मामले की समीक्षा के लिए एक कमेटी बनाने के बाद लिया गया है। इससे उन वकीलों और मुवक्किलों को राहत मिली है जो शनिवार को कोर्ट आने का विरोध कर रहे थे।
दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट ने 9 जुलाई 2026 को अपनी फुल बेंच की मीटिंग में यह तय किया था कि हर महीने के पहले और तीसरे शनिवार को कोर्ट की कार्यवाही होगी। इस फैसले की आधिकारिक सूचना 17 जुलाई 2026 को जारी की गई थी। इससे पहले दिसंबर 2025 में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के सुझाव पर इन शनिवारों को वर्किंग डे बनाने का विचार आया था।
इस फैसले का दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने पुरजोर विरोध किया। वकीलों का कहना था कि इससे उन पर काम का बोझ बहुत बढ़ जाएगा और वे मानसिक रूप से थक जाएंगे। उनका तर्क था कि कई वकील दिल्ली के बाहर की अदालतों, ट्रिब्यूनल और मध्यस्थता के मामलों में व्यस्त रहते हैं, जिससे उनके निजी जीवन और पेशेवर काम के बीच संतुलन बिगड़ जाएगा। विरोध इतना बढ़ा कि 2 अप्रैल 2026 को एसोसिएशन ने इन शनिवारों पर काम का बहिष्कार करने का प्रस्ताव भी पास कर लिया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय ने एक समिति का गठन किया है। यह कमेटी अब इस बात की जांच करेगी कि शनिवार को अदालत लगाना कितना व्यावहारिक और सही है। एक सर्वे में भी यह बात सामने आई थी कि करीब 70 प्रतिशत से ज्यादा वकील इस फैसले के खिलाफ थे। कई वकीलों ने सुझाव दिया कि अगर लंबित मामलों को कम करना है, तो न्यायाधीशों की संख्या बढ़ानी चाहिए और खाली पदों को भरना ज्यादा असरदार होगा।