Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने कुछ कार्यकर्ताओं को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखने और उन्हें यातना देने के आरोपों पर दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की बेंच ने कहा कि ये आरोप
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने कुछ कार्यकर्ताओं को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखने और उन्हें यातना देने के आरोपों पर दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की बेंच ने कहा कि ये आरोप बहुत गंभीर हैं और पुलिस को कानून की तय प्रक्रिया का पालन करना चाहिए था। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर उचित कार्रवाई नहीं दिखी तो मामला CBI को सौंप दिया जाएगा।
पुलिस पर क्या हैं आरोप और कोर्ट ने क्या कहा?
कार्यकर्ताओं के परिजनों ने बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिकाएं दायर की थीं, जिनमें पुलिस पर अवैध हिरासत और प्रताड़ना के आरोप लगाए गए। कोर्ट ने पुलिस द्वारा सीलबंद लिफाफे में दी गई रिपोर्ट पर नाराजगी जताई और 19 मई तक पूरा केस रिकॉर्ड पेश करने का आदेश दिया। अदालत ने साफ किया कि पूछताछ के लिए यातना का सहारा नहीं लिया जा सकता और अगर शक था तो कानूनी तरीका अपनाना चाहिए था।
दिल्ली पुलिस का क्या है पक्ष?
दिल्ली पुलिस (Special Cell) ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत बताया है। पुलिस का कहना है कि इन लोगों को जुलाई 2025 में दर्ज एक गुमशुदा महिला और माओवादी कनेक्शन से जुड़ी FIR के सिलसिले में कानूनी पूछताछ के लिए बुलाया गया था। पुलिस के मुताबिक 12, 13 और 14 मार्च 2026 को पूछताछ हुई और सभी को हर दिन घर भेज दिया गया था।
मामले से जुड़ी अन्य मुख्य बातें
- रुद्र विक्रम: एक लापता कार्यकर्ता के बारे में कोर्ट ने पुलिस को पता लगाने और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने को कहा है।
- संगठन: पुलिस ने इन कार्यकर्ताओं को ‘भगत सिंह छात्र एकता मंच’ जैसे संगठनों से जुड़ा बताया है, जिन्हें पुलिस ने राष्ट्र विरोधी करार दिया है।
- पिछली घटना: नवंबर 2025 में इंडिया गेट पर वायु प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों पर माओवादी नारे लगाने का मामला दर्ज हुआ था।
- CCTV मुद्दे: कोर्ट ने शहर में कई जगहों पर सीसीटीवी कैमरों के काम न करने पर भी नाराजगी जताई है।