Delhi High Court का सख्त रुख, HMIS और Saarthi ऐप का मांगा लाइव डेमो; कैंसर संस्थान में बेकार पड़ी मशीनों पर जताई चिंता
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने शहर की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वह NextGen e-Hospital Management Information System (HMIS) और ICU बेड की जानकारी देने व
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने शहर की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वह NextGen e-Hospital Management Information System (HMIS) और ICU बेड की जानकारी देने वाले Saarthi मोबाइल ऐप का लाइव डेमो पेश करे। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि यह देखा जा सके कि मरीजों को समय पर इलाज और बेड की जानकारी मिल पा रही है या नहीं।
सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोरा की बेंच ने दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (DSCI) की हालत पर गहरी चिंता जताई। रिपोर्ट के मुताबिक, इस संस्थान में करोड़ों रुपये के महंगे मेडिकल उपकरण मौजूद हैं, लेकिन ट्रेंड स्टाफ की कमी की वजह से वे बेकार पड़े हैं। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है और उनके इलाज में काफी देरी हो रही है।
जानकारी के मुताबिक, कैंसर संस्थान में करीब 60 प्रतिशत पद खाली हैं। हालत यह है कि PET-CT और मेडिकल साइक्लोट्रॉन जैसी जरूरी जांच सेवाएं 2019 से ही बंद पड़ी हैं क्योंकि इन्हें चलाने के लिए स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं हैं। इस वजह से दिल्ली के मरीजों को मजबूरी में महंगे प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
वहीं, दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया है कि शहर के 38 सरकारी अस्पतालों में NextGen e-Hospital HMIS सिस्टम लागू कर दिया गया है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म में OPD, IPD और लैब जैसी 14 अलग-अलग सुविधाएं शामिल हैं। हालांकि, कोर्ट ने पहले ही यह गौर किया था कि कई अस्पतालों में एडमिशन और डिस्चार्ज का काम अब भी कागजों पर हो रहा है, जिससे रियल टाइम डेटा नहीं मिल पाता।
कोर्ट ने पहले भी दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि ICU बेड और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की उपलब्धता की जानकारी एक वेब पोर्टल या ऐप के जरिए आम जनता को मिले, ताकि इमरजेंसी के समय मरीजों को भटकना न पड़े। इसी सिलसिले में अब लाइव डेमो की मांग की गई है।