Delhi High Court का बड़ा कदम, फिल्मों और OTT प्लेटफॉर्म पर इंडियन साइन लैंग्वेज अनिवार्य करने की मांग पर केंद्र से मांगा जवाब
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐसी याचिका पर सुनवाई की है जिसमें फिल्मों को देखने के अनुभव को सबके लिए आसान बनाने की बात कही गई है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है कि क्या सिनेमाघरों और OTT प्लेटफॉर्म पर दिखाई जाने
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐसी याचिका पर सुनवाई की है जिसमें फिल्मों को देखने के अनुभव को सबके लिए आसान बनाने की बात कही गई है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है कि क्या सिनेमाघरों और OTT प्लेटफॉर्म पर दिखाई जाने वाली फिल्मों में इंडियन साइन लैंग्वेज (ISL) की सुविधा अनिवार्य की जा सकती है। यह कदम उन लोगों के लिए बहुत मददगार होगा जो सुन नहीं सकते और साइन लैंग्वेज के जरिए फिल्मों का आनंद लेते हैं।
यह याचिका India Signing Hands नाम की संस्था ने दाखिल की है। संस्था का कहना है कि वर्तमान नियमों में साइन लैंग्वेज की कमी है, जो कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों के कानून का उल्लंघन है। याचिका में यह मांग की गई है कि फिल्मों के सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए जो गाइडलाइंस मार्च 2024 में जारी की गई थीं, उनमें बदलाव किया जाए ताकि बधिर समुदाय के लोग भी फिल्मों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का पूरा लाभ उठा सकें।
कोर्ट ने इस मामले में जस्टिस स्वरना कांता शर्मा ने 20 जुलाई 2026 को सूचना जारी की। इसमें केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MEITY) और सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से जवाब मांगा गया है। केंद्र सरकार को तीन हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा गया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर 2026 को होगी।
याचिका में तर्क दिया गया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत जानकारी प्राप्त करना और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति में हिस्सा लेना एक बुनियादी अधिकार है। अगर फिल्मों में साइन लैंग्वेज नहीं होगी, तो बधिर व्यक्ति इस अधिकार से वंचित रह जाएंगे। इससे पहले 15 जुलाई 2026 को भी कोर्ट ने मंत्रालय को निर्देश दिया था कि ऑडियो डिस्क्रिप्शन और सबटाइटल्स जैसी सुविधाएं प्रमुखता से दिखाई जाएं ताकि दिव्यांग लोग मनोरंजन का हक पा सकें।