Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने लोगों की प्राइवेसी को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने ‘राइट टू बी फॉरगॉटन’ यानी ‘भूल जाने के अधिकार’ को मान्यता दी है। अब अगर किसी व्यक्ति का नाम किसी पुराने
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने लोगों की प्राइवेसी को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने ‘राइट टू बी फॉरगॉटन’ यानी ‘भूल जाने के अधिकार’ को मान्यता दी है। अब अगर किसी व्यक्ति का नाम किसी पुराने कोर्ट केस या खबर में है और वह अब उसके लिए जरूरी नहीं है, तो उसे सर्च इंजन से हटवाया जा सकता है। जस्टिस सचिन दत्ता ने यह आदेश 29 मई 2026 को दिया।
किन लोगों को मिलेगा इस फैसले से फायदा
यह फैसला उन लोगों के लिए बहुत मददगार है जिन्हें कोर्ट से बरी कर दिया गया है या जिनके केस आपसी समझौते से खत्म हो गए हैं। खासतौर पर वैवाहिक विवादों या ऐसे मामलों में जहां व्यक्ति का नाम गलती से आया था, वे अब अपनी जानकारी इंटरनेट से हटाने की मांग कर सकते हैं। कोर्ट ने माना कि डिजिटल रिकॉर्ड हमेशा के लिए रहना जरूरी नहीं है, खासकर तब जब वह किसी की निजी जिंदगी को प्रभावित करे।
Google और अन्य प्लेटफॉर्म्स को क्या निर्देश मिले
कोर्ट ने Google जैसे सर्च इंजन और Indian Kanoon जैसे लीगल डेटाबेस प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वे ‘नाम आधारित सर्च’ (name-based search) को बंद करें। इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति का नाम लिखकर सर्च करेगा, तो वह पुराना रिकॉर्ड सामने नहीं आएगा। हालांकि, रिकॉर्ड पूरी तरह खत्म नहीं होंगे, उन्हें केस नंबर या तारीख के जरिए अभी भी ढूंढा जा सकेगा।
सरकार और MEITY की क्या भूमिका होगी
कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MEITY) को आदेश दिया है कि वह यह सुनिश्चित करे कि सभी सर्च इंजन और प्लेटफॉर्म इस नियम का पालन करें। मंत्रालय को इस संबंध में कोर्ट में एक हलफनामा भी दाखिल करना होगा। कोर्ट ने साफ कहा कि कोई भी कानून Google को यह अधिकार नहीं देता कि वह किसी व्यक्ति की प्राइवेसी से ऊपर उठकर उसके पुराने न्यायिक रिकॉर्ड को हमेशा के लिए इंटरनेट पर दिखाए।
Frequently Asked Questions (FAQs)
राइट टू बी फॉरगॉटन (Right to be Forgotten) क्या है?
यह एक व्यक्ति का वह अधिकार है जिसके तहत वह अपनी निजी जानकारी को इंटरनेट या पब्लिक डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटवाने की मांग कर सकता है, अगर वह जानकारी अब किसी सार्वजनिक उद्देश्य के लिए जरूरी नहीं है।
क्या कोर्ट के रिकॉर्ड पूरी तरह से डिलीट हो जाएंगे?
नहीं, रिकॉर्ड डिलीट नहीं होंगे। केवल ‘नाम आधारित सर्च’ को बंद किया जाएगा। रिकॉर्ड को केस नंबर, साइटेशन या कोर्ट की तारीख डालकर अभी भी एक्सेस किया जा सकेगा।