Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्नाव रेप पीड़िता की उस अपील को खारिज कर दिया है जिसमें पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा बढ़ाने की मांग की गई थी। यह मामला पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत से जुड़ा है। जस्टिस
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्नाव रेप पीड़िता की उस अपील को खारिज कर दिया है जिसमें पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा बढ़ाने की मांग की गई थी। यह मामला पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत से जुड़ा है। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुदेजा की पीठ ने सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को यह फैसला सुनाया।
अपील खारिज होने की मुख्य वजह क्या रही?
कोर्ट ने पाया कि इस अपील को दायर करने की समय सीमा मई 2022 में ही खत्म हो गई थी। याचिका को दाखिल करने में 1,199 दिनों की देरी हुई थी। कुछ दस्तावेजों में यह देरी 1,945 दिनों तक बताई गई है। अदालत ने इस देरी को लापरवाही भरा और अस्पष्ट माना। कोर्ट के मुताबिक पीड़िता इस देरी के लिए कोई ठोस और पर्याप्त कारण नहीं बता पाई।
कोर्ट ने सेंगर के अधिकारों पर क्या कहा?
अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि इतनी देरी के बाद याचिका को स्वीकार करना कुलदीप सिंह सेंगर के अधिकारों के साथ अन्याय होगा। कोर्ट का मानना था कि इससे आरोपी को लंबे समय तक मुकदमे की अनिश्चितता झेलनी पड़ती। मुकदमे के खत्म होने के बहुत समय बाद भी सजा बढ़ने की संभावना रखना कानूनी रूप से सही नहीं है।
क्या था पूरा मामला और पीड़िता की दलीलें?
- यह अपील तीस हजारी कोर्ट के मार्च 2020 के फैसले के खिलाफ थी।
- उस फैसले में सेंगर को पिता की मौत के मामले में 10 साल की जेल हुई थी।
- पीड़िता ने देरी की वजह वित्तीय तंगी, धमकियां, उत्पीड़न और घर से जुड़ी समस्याओं को बताया था।
- कोर्ट ने इन दलीलों को बिना किसी दस्तावेजी सबूत के अस्पष्ट पाया और अपील खारिज कर दी।