Delhi: राजधानी दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके में फरवरी 2020 में हुए दंगों की बड़ी साजिश के मामले में एक अहम फैसला आया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने कांग्रेस की पूर्व पार्षद Ishrat Jahan को मिली जमानत को रद्द करने की दिल्ली पुलि
Delhi: राजधानी दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके में फरवरी 2020 में हुए दंगों की बड़ी साजिश के मामले में एक अहम फैसला आया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने कांग्रेस की पूर्व पार्षद Ishrat Jahan को मिली जमानत को रद्द करने की दिल्ली पुलिस की याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर dudeja की बेंच ने निचली अदालत के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने जमानत रद्द करने से क्यों किया इनकार?
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि Ishrat Jahan को जमानत मिले चार साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। इस दौरान ऐसा कोई सबूत या आरोप सामने नहीं आया कि उन्होंने जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन किया हो। कोर्ट ने साफ किया कि यह फैसला मामले की मेरिट पर नहीं, बल्कि जमानत की शर्तों के पालन के आधार पर लिया गया है।
दिल्ली पुलिस की क्या दलीलें थीं?
पुलिस ने कोर्ट में दलील दी थी कि निचली अदालत ने अहम सबूतों और बयानों को नजरअंदाज किया है। पुलिस का कहना था कि 2020 के दंगे एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा थे, जिसे तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति के दौरे के समय अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान खींचने के लिए किया गया था। पुलिस ने ‘चक्का जाम’ को एक आतंकवादी कृत्य बताया था, लेकिन कोर्ट ने जमानत रद्द करने के लिए इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना।
इशरत जहां पर लगे आरोप और केस की स्थिति
- आरोप: Ishrat Jahan पर दंगा भड़काने, गैरकानूनी सभा करने और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप हैं।
- कानून: उन पर IPC, सार्वजनिक संपत्ति नुकसान रोकथाम अधिनियम, Arms Act और UAPA के तहत केस दर्ज है।
- पिछला फैसला: मार्च 2022 में स्पेशल कोर्ट ने उन्हें जमानत दी थी, क्योंकि कोर्ट को लगा था कि चक्का जाम का विचार उनका नहीं था।
- वर्तमान स्थिति: वह जमानत पर रहेंगी, जबकि इसी मामले के अन्य आरोपी जैसे Umar Khalid और Sharjeel Imam अभी भी जेल में हैं।