Delhi: पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। उन्नाव रेप पीड़िता ने कस्टडी में पिता की मौत के मामले में सेंगर की सजा बढ़ाने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने इस अर्
Delhi: पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। उन्नाव रेप पीड़िता ने कस्टडी में पिता की मौत के मामले में सेंगर की सजा बढ़ाने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने इस अर्जी को स्वीकार करने से इनकार करते हुए पीड़िता की देरी को मुख्य कारण बताया।
कोर्ट ने अर्जी क्यों खारिज की?
जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की पीठ ने पाया कि यह अर्जी दाखिल करने में 1945 दिनों की बहुत ज्यादा देरी हुई है। कोर्ट ने इसे लापरवाही और जानबूझकर की गई निष्क्रियता माना। पीड़िता ट्रायल कोर्ट के 2020 के फैसले के खिलाफ अपील करने में इतनी देरी का कोई ठोस कारण नहीं बता पाई। कोर्ट ने कहा कि इतनी देरी के बाद अपील स्वीकार करने से दोषियों के अधिकारों पर असर पड़ेगा और कानूनी प्रक्रिया लंबी खिंचेगी।
क्या थी पीड़िता की मांग और कोर्ट का फैसला?
पीड़िता चाहती थी कि कुलदीप सिंह सेंगर और अन्य दोषियों को IPC की धारा 302 के तहत हत्या का दोषी मानकर मौत की सजा दी जाए। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने उन्हें ‘गैर-इरादतन हत्या’ (IPC धारा 304) का दोषी माना था और 10 साल की सजा सुनाई थी। इस मामले की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
| विवरण |
जानकारी |
| मूल सजा |
10 साल कठोर कारावास और 10 लाख जुर्माना |
| घटना की तारीख |
9 अप्रैल, 2018 (पिता की हिरासत में मौत) |
| ट्रायल कोर्ट का फैसला |
13 मार्च, 2020 |
| अर्जी में देरी |
1940 से अधिक दिन |
| मुख्य आरोपी |
कुलदीप सिंह सेंगर (पूर्व विधायक) |
पीड़िता के तर्कों पर कोर्ट का क्या कहना था?
पीड़िता ने देरी के लिए आर्थिक तंगी, रहने की समस्या, शारीरिक कमजोरी और धमकियों का हवाला दिया था। लेकिन कोर्ट ने इन तर्कों को अस्पष्ट बताया। अदालत ने कहा कि इन दावों के समर्थन में कोई दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किए गए और यह भी साफ नहीं हुआ कि ये परिस्थितियां कब तक रहीं। वहीं CBI के वकील ने भी कोर्ट को बताया कि एजेंसी ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को स्वीकार कर लिया है।