NSE की पूर्व CEO चित्रा रामकृष्ण को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका, अब भ्रष्टाचार मामले में चलेगा केस
Finance: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की पूर्व CEO और MD चित्रा रामकृष्ण की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने भ्रष्टाचार निरोधक कानून (PC Act) के कुछ नियमों को चु
Finance: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की पूर्व CEO और MD चित्रा रामकृष्ण की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने भ्रष्टाचार निरोधक कानून (PC Act) के कुछ नियमों को चुनौती दी थी। कोर्ट ने साफ कहा है कि स्टॉक एक्सचेंज कोई साधारण बिजनेस नहीं हैं, बल्कि वे जनता के लिए बहुत जरूरी काम करते हैं।
यह फैसला जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुदेजा की बेंच ने गुरुवार, 9 जुलाई 2026 को सुनाया। चित्रा रामकृष्ण ने कोर्ट में दलील दी थी कि ‘पब्लिक ड्यूटी’ और ‘पब्लिक सर्वेंट’ की परिभाषा उन पर लागू नहीं होनी चाहिए। उन्होंने भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 2(b) और 2(c)(viii) को चुनौती दी थी। कोर्ट ने इस दलील को नामंजूर करते हुए कहा कि NSE जैसे संस्थान सार्वजनिक कार्य करते हैं और इसके MD और CEO के तौर पर चित्रा रामकृष्ण को इन जिम्मेदारियों से अलग नहीं किया जा सकता।
इस मामले की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
| बिंदु | विवरण | |
|---|---|---|
| मामला | NSE को-लोकेशन स्कैम की जांच | |
| जांच एजेंसी | Central Bureau of Investigation (CBI) | |
| कोर्ट का फैसला | चित्रा रामकृष्ण की याचिका खारिज | |
| मुख्य तर्क | स्टॉक एक्सचेंज पब्लिक फंक्शन करते हैं, साधारण कमर्शियल वेंचर नहीं | |
| संबंधित अधिकारी | आनंद सुब्रमण्यम (पूर्व कर्मचारी) | |
| नियामक संस्था | SEBI (जिसने पहले वित्तीय अनियमितताओं का इशारा किया था) |
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके इस फैसले का असर ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर नहीं पड़ेगा। ट्रायल कोर्ट सबूतों की जांच खुद करेगा और कानून के हिसाब से फैसला सुनाएगा। अब इस फैसले के बाद CBI द्वारा चलाए जा रहे को-लोकेशन स्कैम के केस में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी।