Delhi High Court का बड़ा फैसला, Special Marriage Act में 30 दिन के नोटिस पीरियड में नहीं मिलेगी छूट
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत शादी के लिए जरूरी 30 दिन के वेटिंग पीरियड को कम करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि कानून में लिखे नियमों को निजी परेशानियों के आधार पर नहीं बदला जा सकत
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत शादी के लिए जरूरी 30 दिन के वेटिंग पीरियड को कम करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि कानून में लिखे नियमों को निजी परेशानियों के आधार पर नहीं बदला जा सकता। यह मामला एक ऐसे जोड़े का था जो दूल्हे की विदेश में नौकरी की वजह से जल्दी शादी करना चाहते थे।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस पुरुषिंद्र कुमार कौरव ने की। याचिकाकर्ताओं ने 11 मई 2026 को शादी का नोटिस दिया था, जिसके बाद उनकी शादी 19 जून 2026 को तय हुई थी। लेकिन दूल्हे को 10 जून 2026 से पहले अपनी विदेशी नौकरी जॉइन करनी थी, इसलिए उन्होंने इस 30 दिन की समय सीमा को कम करने की मांग की थी। उन्होंने इसके लिए कालकाजी के मैरिज ऑफिसर से भी संपर्क किया था।
जस्टिस कौरव ने अपने फैसले में कहा कि स्पेशल मैरिज एक्ट की धारा 5, 6, 7 और 16 के तहत यह 30 दिन का समय एक अनिवार्य कानूनी जरूरत है। कोर्ट ने माना कि चाहे व्यक्तिगत कठिनाई कितनी भी सच्ची क्यों न हो, उसे कानून की अनदेखी का आधार नहीं बनाया जा सकता। अगर कोर्ट ऐसी छूट देता है, तो अधिकारियों को कानून के खिलाफ जाकर काम करना पड़ेगा।
कोर्ट ने आगे कहा कि जब विधायिका कानून बनाती है, तो वह व्यावहारिक दिक्कतों और संभावित समस्याओं को ध्यान में रखकर ही नियम तय करती है। इसलिए अदालतें व्यक्तिगत जरूरतों के आधार पर कानून को दोबारा नहीं लिख सकतीं। इसी आधार पर दिल्ली हाई कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया और कपल को तय समय सीमा के बाद ही शादी करने को कहा।