Delhi: सोनम वांगचुक को प्राइवेट अस्पताल भेजने से हाई कोर्ट का इनकार, सफदरजंग अस्पताल में जारी रहेगा इलाज

Delhi: जलवायु कार्यकर्ता Sonam Wangchuk को सफदरजंग अस्पताल से किसी प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि सरकार का उन्हें अस्पताल में भर्ती करने का फैसला मनमा

Delhi: जलवायु कार्यकर्ता Sonam Wangchuk को सफदरजंग अस्पताल से किसी प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि सरकार का उन्हें अस्पताल में भर्ती करने का फैसला मनमाना नहीं था। वांगचुक की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें भर्ती कराया गया था, इसलिए कोर्ट ने उन्हें किसी अन्य अस्पताल भेजने से मना कर दिया है।

जस्टिस Mini Pushkarna की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने बताया कि Sonam Wangchuk एक आजाद नागरिक हैं और उन्हें हिरासत में नहीं रखा गया है। उनकी पत्नी Gitanjali J Angmo ने उन्हें Medanta Hospital भेजने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट के मुताबिक, डॉक्टरों ने उनकी सहमति से ही इलाज शुरू किया है और अभी केवल मौखिक दवाएं दी जा रही हैं।

केंद्र सरकार की तरफ से Additional Solicitor General Chetan Sharma ने दलील दी कि 18 दिनों तक भूख हड़ताल और खराब मौसम की वजह से वांगचुक की सेहत काफी गिर गई थी। उनके शरीर में पोटेशियम और ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम हो गया था, जिसके कारण दिल्ली पुलिस उन्हें 18 जुलाई को सफदरजंग अस्पताल ले गई थी।

कोर्ट ने अब सरकार को निर्देश दिया है कि वह तीन दिनों के भीतर उनकी सेहत की नई रिपोर्ट पेश करे। इस मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई 2026 को होगी। वहीं, 20 जुलाई को अस्पताल से जारी एक बयान में Sonam Wangchuk ने कहा कि अगर शिक्षा प्रणाली की विफलताओं की जवाबदेही तय होती है या राजनीतिक नेताओं से आश्वासन मिलता है, तो वह अपना उपवास खत्म कर देंगे। उन्होंने अस्पताल में अपने रुकने को अवैध हिरासत भी बताया है।