Delhi HC ने CJP प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की याचिका खारिज की, कहा- संबंधित अधिकारियों से मिलें

Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने जंतर मंतर पर हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और तोड़फोड़ को लेकर दायर एक जनहित याचिका (PIL) को सुनने से इनकार कर दिया है। यह याचिका ‘सेव इंडिया फ

Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने जंतर मंतर पर हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और तोड़फोड़ को लेकर दायर एक जनहित याचिका (PIL) को सुनने से इनकार कर दिया है। यह याचिका ‘सेव इंडिया फाउंडेशन’ नाम की एक NGO ने दायर की थी, जिसमें दिल्ली पुलिस से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त आपराधिक कार्रवाई करने की मांग की गई थी।

शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 को मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय, जस्टिस तेजस करिया और जस्टिस प्रतीक जालन की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह सलाह दी कि वे इस मामले के लिए उचित अधिकारियों के पास जा सकते हैं, जो कानून के तहत जरूरी कार्रवाई करेंगे। अदालत ने साफ किया कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के मामलों के लिए ‘पब्लिक प्रॉपर्टी डैमेज प्रिवेंशन एक्ट, 1984’ और सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले जैसे कानूनी नियम पहले से ही मौजूद हैं।

इसी तरह एक अन्य याचिका में CJP विरोध प्रदर्शनों की NIA जांच की मांग की गई थी, जिसे कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि NIA को सक्रिय करने का फैसला केंद्र सरकार का होता है, न्यायपालिका का नहीं। इसके बाद याचिकाकर्ता ने अपनी यह याचिका वापस ले ली।

बता दें कि यह पूरा विवाद 20 जुलाई 2026 को जंतर मंतर पर हुए CJP के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है, जहाँ कथित तौर पर आगजनी और पुलिस कर्मियों पर हमले हुए थे। इस बीच, CJP ने घोषणा की है कि वे उन पुलिसकर्मियों की पहचान करने के लिए एक वेबसाइट शुरू करेंगे जिन्होंने प्रदर्शन के दौरान सख्ती बरती थी। दूसरी तरफ, सरकार ने NEET उम्मीदवारों की आत्महत्या से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने और प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ FIR वापस लेने पर सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।