Delhi: जंतर मंतर प्रोटेस्ट की NIA जांच की मांग खारिज, हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने की अनुमति दी
Delhi: राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन की NIA जांच की मांग को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि किसी मामले में NIA जांच शुरू करने का फैसला केंद्र सरकार का होता है, अदालत इसे थोप
Delhi: राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन की NIA जांच की मांग को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि किसी मामले में NIA जांच शुरू करने का फैसला केंद्र सरकार का होता है, अदालत इसे थोप नहीं सकती। इस सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता सतीश कुमार अग्रवाल ने अपनी याचिका वापस ले ली है।
यह पूरा मामला 20 जुलाई 2026 को हुए ‘संसद चलो’ मार्च से जुड़ा है। याचिकाकर्ता सतीश कुमार अग्रवाल, जो अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं, ने आरोप लगाया था कि इस तथाकथित छात्र आंदोलन ने दो-तीन दिनों तक दिल्ली को बंधक बना लिया था। उन्होंने अपनी याचिका में दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ हुई, पत्रकारों पर हमले हुए और पुलिसकर्मियों को चोटें आईं। साथ ही उन्होंने यह आशंका भी जताई कि यह विरोध प्रदर्शन राजनीतिक रूप से प्रेरित था और इसमें विदेशी फंडिंग वाली संस्थाओं का हाथ हो सकता है।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि NIA एक्ट, 2008 की धारा 6 के तहत जांच का निर्णय केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। कोर्ट ने बताया कि वह सरकार की संतुष्टि की जगह अपना फैसला नहीं रख सकता। हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को संबंधित अधिकारियों के पास अपनी बात रखने (representation) की अनुमति दे दी है, जिस पर कानून के हिसाब से विचार किया जाएगा।
इस विरोध प्रदर्शन का असर दिल्ली की आम जनता पर काफी पड़ा था। प्रदर्शन के कारण कई सड़कें बंद रहीं और मध्य दिल्ली के 18 मेट्रो स्टेशन बंद करने पड़े थे। इसी बीच, JNU और दिल्ली यूनिवर्सिटी ने भी अपने छात्रों के लिए एडवाइजरी जारी की थी, जिसमें उन्हें जंतर मंतर जाने से बचने की सलाह दी गई थी। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अन्य वकील मौजूद थे।