Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मौलवी को नियमित जमानत देने से मना कर दिया है। आरोपी पर एक नाबालिग लड़की के साथ आध्यात्मिक इलाज के नाम पर बार-बार यौन शोषण करने का आरोप है। जस्टिस स्वरणा कांता शर्मा की सिंगल बेंच ने यह फैसला
Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मौलवी को नियमित जमानत देने से मना कर दिया है। आरोपी पर एक नाबालिग लड़की के साथ आध्यात्मिक इलाज के नाम पर बार-बार यौन शोषण करने का आरोप है। जस्टिस स्वरणा कांता शर्मा की सिंगल बेंच ने यह फैसला सुनाया है।
मौलवी ने कैसे किया शोषण और क्या है मामला
आरोपी मोहम्मद मुबारक खुद को एक मौलवी और आस्था उपचारक (faith healer) बताता है। आरोप है कि उसने नाबालिग लड़की के शरीर से जिन्न या बुरी आत्मा निकालने के बहाने उसका यौन शोषण किया। इस मामले की FIR प्रेम नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। पीड़िता ने कोर्ट और धारा 164 CrPC के तहत दिए अपने बयान में इन आरोपों की पुष्टि की है।
कोर्ट ने जमानत याचिका क्यों खारिज की
जस्टिस स्वरणा कांता शर्मा ने कहा कि आरोपी ने लड़की की नाजुक शारीरिक और मानसिक स्थिति और उसके परिवार के अंधे विश्वास का फायदा उठाया। कोर्ट ने साफ किया कि बलात्कार जैसे गंभीर मामलों में जब ट्रायल शुरू हो चुका हो और गवाहों के बयान दर्ज हो रहे हों, तो जमानत देने में सावधानी बरतनी चाहिए। आरोपी अक्टूबर 2019 से जेल में है, लेकिन अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसे राहत नहीं मिली।
ट्रायल कोर्ट को क्या निर्देश दिए गए
हालांकि आरोपी पिछले छह साल से ज्यादा समय से जेल में है, लेकिन कोर्ट ने जमानत देने के बजाय मामले की सुनवाई तेज करने पर जोर दिया। दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह इस मामले की कार्यवाही को जल्द से जल्द पूरा करे और फैसला सुनाए ताकि आरोपी की लंबी हिरासत को देखते हुए न्याय मिल सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
आरोपी मौलवी पर कौन सी धाराएं लगी हैं?
आरोपी मोहम्मद मुबारक पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 (बलात्कार) और POCSO एक्ट की धारा 4 और 6 के तहत मामला दर्ज है।
कोर्ट ने जमानत देने से क्यों मना किया?
कोर्ट ने माना कि आरोपी ने पीड़िता के परिवार के अंधे विश्वास और उसकी मानसिक स्थिति का फायदा उठाया, साथ ही अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत खारिज कर दी।