Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक तीन साल की बच्ची की जान बचाने के लिए केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। बच्ची एक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी से जूझ रही है और उसके बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए 40 लाख रुपये की वित्तीय सहायता की जरूरत
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक तीन साल की बच्ची की जान बचाने के लिए केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। बच्ची एक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी से जूझ रही है और उसके बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए 40 लाख रुपये की वित्तीय सहायता की जरूरत है। जस्टिस अमित शर्मा की वेकेशन बेंच ने इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
बच्ची की बीमारी और इलाज की क्या है स्थिति?
बच्ची का नाम संस्कृति भगत (सांची) है, जिसे जुलाई 2025 में Whole Genome Test के बाद LRBA डेफिशिएंसी नाम की दुर्लभ बीमारी का पता चला था। सितंबर 2022 में जन्म के कुछ समय बाद से ही उसे बार-बार बुखार और एनीमिया जैसी गंभीर समस्याएं होने लगी थीं। चेन्नई के Apollo Hospital के डॉक्टरों ने बताया कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट ही एकमात्र इलाज है, जिसमें बच्ची के पिता डोनर बनेंगे।
सरकारी मदद और कोर्ट की कार्यवाही में क्या हुआ?
बच्ची के परिवार ने 1 जून 2026 को अधिकारियों को फंड के लिए आवेदन दिया था। AIIMS Delhi ने परिवार को बताया कि उनके पास इस विशेष इलाज की सुविधा नहीं है। 5 जून 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां वकील अशोक अग्रवाल ने दलील दी कि नेशनल पॉलिसी फॉर रेयर डिजीज (NPRD) का मुख्य मकसद जान बचाना है, चाहे इलाज सरकारी अस्पताल में हो या प्राइवेट में। अब इस मामले की अगली सुनवाई 8 जून 2026 को होगी।
रेयर डिजीज पॉलिसी के तहत कितनी मिलती है मदद?
नेशनल पॉलिसी फॉर रेयर डिजीज (NPRD) 2021 के तहत पात्र मरीजों को इलाज के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने मई 2022 में इस सहायता राशि की सीमा को 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया था। इसी पॉलिसी के तहत बच्ची के परिवार ने 40 लाख रुपये की मांग की है ताकि समय पर इलाज शुरू हो सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बच्ची को कौन सी बीमारी है और इसका इलाज क्या है?
बच्ची LRBA (Lipopolysaccharide-Responsive Beige-Like Anchor Protein) डेफिशिएंसी नाम की दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है। डॉक्टरों के अनुसार, इसका एकमात्र इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांट है।
नेशनल पॉलिसी फॉर रेयर डिजीज (NPRD) के तहत कितनी आर्थिक मदद मिलती है?
इस पॉलिसी के तहत पात्र मरीजों के इलाज के लिए अधिकतम 50 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाती है, जिसे मई 2022 में बढ़ाया गया था।