Delhi: एक तीन साल की बच्ची Anidel, जो LRBA deficiency नाम की दुर्लभ बीमारी से जूझ रही है, उसकी जान बचाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है। बच्ची के पिता ने केंद्र सरकार से इलाज के लिए करीब 40 लाख रुपये की
Delhi: एक तीन साल की बच्ची Anidel, जो LRBA deficiency नाम की दुर्लभ बीमारी से जूझ रही है, उसकी जान बचाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है। बच्ची के पिता ने केंद्र सरकार से इलाज के लिए करीब 40 लाख रुपये की आर्थिक मदद मांगी है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय पर बोन मैरो ट्रांसप्लांट नहीं हुआ, तो बच्ची की जान को खतरा हो सकता है।
बच्ची की बीमारी और इलाज की जरूरत क्या है?
Anidel सितंबर 2022 में पैदा हुई थी और उसे LRBA deficiency है, जो एक जेनेटिक बीमारी है। इससे शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है, जिससे बार-बार बुखार आता है और हीमोग्लोबिन कम होने लगता है। बच्ची को कई बार ब्लड और प्लेटलेट्स चढ़ाने पड़े हैं। अब डॉक्टरों ने चेन्नई के Apollo Hospital में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सलाह दी है, जिसके लिए पैसों की सख्त जरूरत है।
सरकारी पॉलिसी और मदद की स्थिति क्या है?
नेशनल पॉलिसी फॉर रेयर डिजीज (NPRD 2021) के तहत दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए सरकार मदद देती है। मई 2022 के नियमों के मुताबिक, इस सहायता राशि को बढ़ाकर 50 लाख रुपये तक किया गया था। याचिका में कहा गया है कि बच्ची इस पॉलिसी के तहत मदद पाने की हकदार है, लेकिन अभी तक अधिकारियों द्वारा कोई फंड जारी नहीं किया गया है।
कोर्ट से क्या मांग की गई है?
बच्ची के पिता ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय से अनुरोध किया है कि इलाज का पूरा खर्च सीधे चेन्नई के Apollo Hospital को दिया जाए। याचिका में मांग की गई है कि इलाज में और देरी न की जाए ताकि बच्ची की जान बचाई जा सके। दिल्ली हाई कोर्ट पहले भी दुर्लभ बीमारियों के मरीजों के लिए फंड और लचीले नियमों की वकालत करता रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
LRBA deficiency क्या बीमारी है?
यह एक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम सही से काम नहीं करता। इसके कारण बार-बार इन्फेक्शन होता है और खून की कमी हो जाती है, जिसका इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांट से संभव है।
NPRD 2021 पॉलिसी के तहत कितनी आर्थिक मदद मिलती है?
नेशनल पॉलिसी फॉर रेयर डिजीज 2021 के तहत, केंद्र सरकार दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए 50 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान करती है।