Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने पिछले महीने कई एक्टिविस्ट्स को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखने और उनके साथ मारपीट करने के आरोपों पर दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर dudeja की बेंच ने क
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने पिछले महीने कई एक्टिविस्ट्स को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखने और उनके साथ मारपीट करने के आरोपों पर दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर dudeja की बेंच ने कहा कि चाहे आरोप कितने भी गंभीर हों, कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। कोर्ट ने साफ किया कि पूछताछ के लिए टॉर्चर का रास्ता नहीं अपनाया जा सकता।
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से क्या कहा और क्या चेतावनी दी?
हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस द्वारा सौंपी गई सीलबंद रिपोर्ट पर नाराजगी जताई और आरोपों को बहुत गंभीर बताया। कोर्ट ने कहा कि उन्हें जांच में पुलिस पर भरोसा नहीं है। बेंच ने चेतावनी दी कि अगर इस मामले में सही कार्रवाई नहीं हुई, तो पूरी जांच CBI को सौंप दी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले को ऐसे ही नहीं जाने देंगे।
पुलिस और एक्टिविस्ट्स के बीच क्या है पूरा विवाद?
यह मामला 12 से 14 मार्च के बीच करीब 10 एक्टिविस्ट्स की कथित गैरकानूनी हिरासत से जुड़ा है। इनमें 6 छात्र, 2 लेबर राइट्स एक्टिविस्ट और 2 विस्थापन विरोधी कार्यकर्ता शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि जुलाई 2025 में दर्ज एक FIR के सिलसिले में उन्हें सिर्फ पूछताछ के लिए बुलाया गया था।
- पुलिस का दावा: दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल और वकील संजीव भंडारी ने टॉर्चर और अपहरण के सभी आरोपों को नकारा है।
- पुलिस का आरोप: पुलिस ने कहा कि ये एक्टिविस्ट ‘भगत सिंह छात्र एकता मंच’ जैसे संगठनों से जुड़े हैं, जो देश विरोधी और नक्सली सामग्री फैलाते हैं।
- मेडिकल सबूत: पुलिस का तर्क है कि एक्टिविस्ट्स ने मारपीट का कोई मेडिकल सबूत नहीं दिया है।
अगली सुनवाई कब होगी और क्या होगा?
दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 19 मई को तय की है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि वह अगली तारीख पर इस पूरे केस की फाइल पेश करे। कोर्ट अब यह देखेगा कि पुलिस ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं और क्या वह संतोषजनक हैं।