Delhi: दिल्ली के निजी स्कूलों और अभिभावकों के लिए एक बड़ी खबर आई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि बिना सरकारी मदद वाले प्राइवेट स्कूल नए सत्र की शुरुआत में अपनी फीस बढ़ा सकते हैं। इसके लिए उन्हें शिक्षा निदेशालय
Delhi: दिल्ली के निजी स्कूलों और अभिभावकों के लिए एक बड़ी खबर आई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि बिना सरकारी मदद वाले प्राइवेट स्कूल नए सत्र की शुरुआत में अपनी फीस बढ़ा सकते हैं। इसके लिए उन्हें शिक्षा निदेशालय (DoE) से पहले अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी।
फीस बढ़ाने के नए नियम क्या हैं?
कोर्ट ने साफ किया है कि दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 की धारा 17(3) के मुताबिक, मान्यता प्राप्त निजी स्कूल नए सत्र की शुरुआत में फीस बढ़ा सकते हैं। हालांकि, स्कूलों को नए सत्र से पहले प्रस्तावित फीस की पूरी जानकारी DoE को देनी होगी। अगर कोई स्कूल साल के बीच में फीस बढ़ाना चाहता है, तो उसे सरकार से अनुमति लेनी पड़ेगी। यह नियम अप्रैल 2027 के सत्र से लागू होगा, लेकिन स्कूल पुरानी तारीख से कोई बकाया फीस नहीं वसूल सकेंगे।
कोर्ट ने शिक्षा निदेशालय (DoE) को क्या कहा?
जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने कहा कि प्राइवेट स्कूलों को अपनी वित्तीय व्यवस्था चलाने की आजादी है। कोर्ट के मुताबिक, शिक्षा निदेशालय स्कूलों के पैसों का माइक्रो-मैनेजमेंट नहीं कर सकता। कोर्ट ने यह भी माना कि अगर स्कूल के खाते में पैसा जमा है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि स्कूल मुनाफाखोरी कर रहा है। DoE का काम सिर्फ यह देखना है कि शिक्षा का व्यावसायीकरण न हो और कोई कैपिटेशन फीस न ली जाए।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या प्राइवेट स्कूल अब जब चाहें तब फीस बढ़ा सकते हैं?
नहीं, बिना अनुमति के फीस सिर्फ नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में बढ़ाई जा सकती है। अगर सत्र के बीच में फीस बढ़ानी है, तो शिक्षा निदेशालय (DoE) की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
क्या स्कूल पिछले सालों की बकाया फीस वसूल सकते हैं?
नहीं, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों को पिछले शैक्षणिक सत्रों के लिए कोई भी बकाया फीस या अन्य शुल्क पिछली तारीख (Retrospective) से वसूलने की अनुमति नहीं होगी।