Delhi: देश में टैटू बनवाने का क्रेज तेजी से बढ़ा है, लेकिन इस बिजनेस के लिए कोई पुख्ता कानून नहीं है। इसी को देखते हुए Delhi High Court में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। इसमें मांग की गई है कि पूरे भारत में टैटू इ
Delhi: देश में टैटू बनवाने का क्रेज तेजी से बढ़ा है, लेकिन इस बिजनेस के लिए कोई पुख्ता कानून नहीं है। इसी को देखते हुए Delhi High Court में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। इसमें मांग की गई है कि पूरे भारत में टैटू इंडस्ट्री के लिए सख्त नियम बनाए जाएं ताकि लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ न हो।
टैटू पार्लर के लिए क्या नियम मांगे गए हैं?
एडवोकेट अभिषेक कुमार चौधरी ने 19 मई 2026 को यह याचिका दायर की। इसमें मांग की गई है कि सभी टैटू पार्लरों के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य हो। साथ ही, साफ-सफाई और मशीनों को स्टेरलाइज करने के कड़े मानक तय किए जाएं। याचिका में यह भी कहा गया है कि माता-पिता की सहमति के बिना नाबालिगों को टैटू बनाना प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।
बिना नियम के टैटू बनवाना क्यों है खतरनाक?
भारत में टैटू इंडस्ट्री करीब 20,000 करोड़ रुपये की है, लेकिन ज्यादातर जगह कोई सरकारी निगरानी नहीं है। गंदी सुइयों और खराब मशीनों के इस्तेमाल से Hepatitis B, Hepatitis C और HIV/AIDS जैसी गंभीर बीमारियां फैलने का डर रहता है। इसके अलावा, कई टैटू इंक में भारी धातुएं (Heavy Metals) मिली हैं, जो शरीर के लिए जहरीली हो सकती हैं।
किन विभागों से जवाब मांगा गया है?
इस याचिका में भारत सरकार, स्वास्थ्य मंत्रालय, गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, कानून मंत्रालय, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और BIS को पार्टी बनाया गया है। इससे पहले कर्नाटक सरकार ने भी टैटू इंक में हानिकारक तत्व मिलने के बाद केंद्र से नियम बनाने की मांग की थी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
टैटू इंडस्ट्री के लिए नियम क्यों जरूरी हैं?
बिना नियम के टैटू पार्लरों में गंदगी और दूषित सुइयों का इस्तेमाल होता है, जिससे HIV और हेपेटाइटिस जैसी जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं। साथ ही, घटिया क्वालिटी की इंक सेहत को नुकसान पहुंचाती है।
क्या नाबालिगों को टैटू बनवाने की अनुमति होगी?
दायर की गई याचिका में मांग की गई है कि बिना माता-पिता की लिखित सहमति के किसी भी नाबालिग को टैटू न बनाया जाए।