Delhi HC का सख्त आदेश, सोशल मीडिया से 24 घंटे में हटाएं न्यायपालिका के खिलाफ फर्जी पोस्ट
Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर न्यायपालिका और जजों के खिलाफ फैलाई जा रही झूठी खबरों पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने मेटा, गूगल और एक्स (X) जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वे आपत्तिजनक
Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर न्यायपालिका और जजों के खिलाफ फैलाई जा रही झूठी खबरों पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने मेटा, गूगल और एक्स (X) जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वे आपत्तिजनक और फर्जी कंटेंट को 24 घंटे के भीतर हटाएं। कोर्ट ने साफ किया कि ऐसी खबरें न्याय प्रणाली में लोगों का भरोसा कम करती हैं।
ताजा मामले में जस्टिस तेजस करिया की वेकेशन बेंच ने शुक्रवार, 20 जून 2026 को आदेश जारी किया। यह मामला बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) की याचिका से जुड़ा है। सोशल मीडिया पर यह फर्जी खबर फैलाई गई थी कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई जज और केंद्रीय कानून मंत्री 7 जून 2026 को लंदन में एक बैडमिंटन टूर्नामेंट में सरकारी खर्चे पर गए थे। कोर्ट ने इसे पूरी तरह झूठ और दुर्भावनापूर्ण बताया है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह 24 घंटे के भीतर इन पोस्ट्स को हटाने, ब्लॉक करने और डी-इंडेक्स करने के लिए जरूरी नोटिफिकेशन जारी करे। इसमें द प्रिंट, नेशनल हेराल्ड और द ट्रिब्यून जैसे प्लेटफॉर्म्स की रिपोर्ट और प्रियंका चतुर्वेदी का एक ट्वीट भी शामिल है। आम जनता को भी ऐसी सामग्री आगे शेयर करने से मना किया गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी।
इससे पहले 8 जून 2026 को भी कोर्ट ने एक अलग मामले में सख्त टिप्पणी की थी। साकेत में एक इमारत ढहने के मामले में जस्टिस नीना बंसल कृष्णा और जस्टिस मधु जैन की बेंच ने डॉ. कपिल कक्कड़ के खिलाफ आदेश दिया था। डॉ. कक्कड़ ने एक जज को ‘हत्यारा’ बताते हुए फर्जी वीडियो पोस्ट किए थे। कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियां मूक दर्शक नहीं बन सकतीं और उन्हें ऐसी गैरकानूनी सामग्री तुरंत हटानी चाहिए। कोर्ट ने उनके वीडियो के URL ब्लॉक करने और अकाउंट निलंबित करने का आदेश दिया था।