Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने राइड-हेलिंग कंपनी Rapido को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह अपने एप्लिकेशन को पूरी तरह से दिव्यांग-अनुकूल बनाए। कोर्ट ने कहा है कि कंपनी को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐप का इस्तेमाल दृष्टिबाधित लोग भी
Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने राइड-हेलिंग कंपनी Rapido को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह अपने एप्लिकेशन को पूरी तरह से दिव्यांग-अनुकूल बनाए। कोर्ट ने कहा है कि कंपनी को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐप का इस्तेमाल दृष्टिबाधित लोग भी आसानी से कर सकें। यह आदेश दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के नियमों को लागू करने के लिए दिया गया है।
Rapido ऐप में क्या कमियां मिलीं और कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट में पेश की गई ऑडिट रिपोर्ट में Rapido ऐप की स्थिति काफी खराब पाई गई। रिपोर्ट के मुताबिक ऐप में कुल 207 एक्सेसिबिलिटी समस्याएं थीं, जिनमें से 81 दिक्कतें बहुत गंभीर श्रेणी की थीं। जस्टिस सचिन दत्ता ने इस स्थिति पर नाराजगी जताई थी। वहीं जस्टिस पुरुशेंद्र कुमार कौरव ने साफ किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म को ऐसा बनाना सेवा प्रदाताओं की जिम्मेदारी है कि वह स्क्रीन रीडर जैसी सहायक तकनीकों के साथ काम करे।
कंपनी पर क्या कार्रवाई होगी और आगे की समय-सीमा क्या है?
कोर्ट ने Rapido को पहले ही निर्देश दिया था कि वह चार महीने के भीतर अपने ऐप को दिव्यांग-अनुकूल बनाए, वरना उसे भारत में अपना कामकाज बंद करना पड़ सकता है। कंपनी ने कोर्ट को भरोसा दिया है कि वह ऐप में सुधार करेगी और अपने स्टाफ व ड्राइवरों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम भी शुरू करेगी। इस मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त, 2025 को होगी।
मामले से जुड़ी मुख्य जानकारियां
| विवरण |
जानकारी |
| याचिका दायर करने की तारीख |
9 नवंबर, 2023 |
| नवीनतम निर्देश की तारीख |
23 अप्रैल, 2026 |
| मुख्य कानून |
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 |
| ऐप में पाई गई कुल त्रुटियां |
207 |
| गंभीर (High Impact) त्रुटियां |
81 |
| अगली सुनवाई की तारीख |
13 अगस्त, 2025 |
इस मामले में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के संयुक्त सचिव से भी जवाब मांगा गया है। कोर्ट जानना चाहता है कि बिना एक्सेसिबिलिटी नियमों का पालन किए Rapido को काम करने की अनुमति कैसे मिली और मंत्रालय इस दिशा में क्या कदम उठा रहा है।