Delhi के 38 सरकारी अस्पतालों का होगा ऑडिट, बुजुर्ग महिला को ICU बेड न मिलने पर हाई कोर्ट सख्त

Delhi: राजधानी के सरकारी अस्पतालों में बेड मिलने की व्यवस्था को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। LNJP अस्पताल में एक बुजुर्ग महिला को ICU बेड नहीं मिलने के मामले पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और शहर के 38 सरकारी अ

Delhi: राजधानी के सरकारी अस्पतालों में बेड मिलने की व्यवस्था को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। LNJP अस्पताल में एक बुजुर्ग महिला को ICU बेड नहीं मिलने के मामले पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और शहर के 38 सरकारी अस्पतालों के ऑडिट का आदेश दिया है। अदालत का मानना है कि ऑनलाइन डेटा और जमीनी हकीकत अलग होने की वजह से मरीजों की जान को खतरा हो रहा है।

यह पूरा मामला 70 वर्षीय कमर जहां नाम की महिला से जुड़ा है, जिन्हें LNJP अस्पताल में ICU बेड नहीं मिला, जबकि ऑनलाइन सिस्टम में बेड खाली दिख रहा था। इस घटना के बाद न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ ने 3 जुलाई 2026 को यह सख्त आदेश जारी किया। कोर्ट ने नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) को निर्देश दिया है कि वह 31 जुलाई 2026 तक सभी 38 अस्पतालों का औचक ऑडिट पूरा करे और ऑनलाइन बेड डेटा के साथ e-HMIS की जांच करे।

सुनवाई के दौरान कुछ और चौंकाने वाली बातें सामने आईं। कोर्ट को बताया गया कि दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में करीब 15.42 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई PET साइक्लोट्रॉन मशीन साल 2022 से सिर्फ इसलिए बंद पड़ी है क्योंकि उसे चलाने के लिए ट्रेंड स्टाफ नहीं है। अदालत ने इसे जनता के पैसों की भारी बर्बादी बताया। साथ ही यह भी पाया गया कि अस्पतालों की वेबसाइट पर दिए गए फोन नंबर काम नहीं कर रहे हैं, जिससे मरीजों को भारी परेशानी हो रही है।

अदालत ने दिल्ली सरकार को NextGen e-HMIS प्लेटफॉर्म और ‘ICU Beds Saarthi’ ऐप का लाइव डेमो देने को कहा है। इसके अलावा सरकार को एक टोल-फ्री हेल्पलाइन शुरू करने और हर अस्पताल में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का सुझाव दिया गया है ताकि मरीजों को रेफर करने में आसानी हो। अब इस पूरे ऑडिट की रिपोर्ट 7 अगस्त 2026 को अगली सुनवाई के दौरान पेश की जाएगी।