Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए CRPF के एक पूर्व कर्मी को रिटायरमेंट के 9 साल बाद इंस्पेक्टर का रैंक देने का आदेश दिया है। राजबीर नाम के इस जवान को 2017 में सब-इंस्पेक्टर के पद से रिटायर किया गया था,
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए CRPF के एक पूर्व कर्मी को रिटायरमेंट के 9 साल बाद इंस्पेक्टर का रैंक देने का आदेश दिया है। राजबीर नाम के इस जवान को 2017 में सब-इंस्पेक्टर के पद से रिटायर किया गया था, लेकिन अब उन्हें उनकी योग्यता के आधार पर पदोन्नति मिलेगी।
राजबीर को प्रमोशन मिलने में देरी क्यों हुई?
राजबीर 17 अगस्त 2017 को इंस्पेक्टर बनने के लिए योग्य थे, लेकिन उनके सर्विस रिकॉर्ड में कुछ कमी रह गई थी। उनका Annual Confidential Report (ACR) पिछली बटालियन से समय पर नहीं मिला था। नियम के मुताबिक ACR और सर्विस रिकॉर्ड 15 दिनों के भीतर मिल जाना चाहिए था, पर ऐसा नहीं हुआ और इसी वजह से उन्हें समय पर प्रमोशन नहीं मिला।
कोर्ट ने क्या आदेश दिया है?
जस्टिस अनिल क्षेत्रापाल और जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने आदेश दिया कि राजबीर को 17 अगस्त 2017 से ही इंस्पेक्टर का रैंक दिया जाए। कोर्ट ने CRPF को निर्देश दिया है कि इस आदेश के 8 हफ्ते के भीतर उन्हें यह रैंक दे दिया जाए। राजबीर ने 2021 में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और उन्होंने बिना किसी वित्तीय लाभ के सिर्फ रैंक की मांग की थी।
राजबीर का CRPF में करियर कैसा रहा?
राजबीर ने 27 जून 1983 को बतौर कांस्टेबल CRPF जॉइन किया था। उन्होंने लंबे समय तक सेवा देने के बाद 31 अगस्त 2017 को Voluntary Retirement Scheme (VRS) के जरिए रिटायरमेंट लिया था। उनकी पैरवी एडवोकेट KK शर्मा ने की थी, जिसके बाद कोर्ट ने उनके हक में फैसला सुनाया।
Frequently Asked Questions (FAQs)
राजबीर को किस तारीख से इंस्पेक्टर माना जाएगा?
दिल्ली हाई कोर्ट के आदेशानुसार, राजबीर को 17 अगस्त 2017 से ही इंस्पेक्टर का रैंक प्रभावी माना जाएगा।
क्या राजबीर को प्रमोशन के साथ बकाया पैसा भी मिलेगा?
नहीं, राजबीर ने कोर्ट में याचिका दायर करते समय स्पष्ट किया था कि उन्हें बिना किसी वित्तीय लाभ (Financial Benefits) के केवल रैंक दिया जाए।