Delhi में शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी पर हाईकोर्ट सख्त, चुनाव आयोग से कहा- टीचरों को रुलाने वाली ड्यूटी न हो
Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) ड्यूटी में स्कूली शिक्षकों की तैनाती को लेकर चुनाव आयोग को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ कहा कि चुनावी काम के चक्कर में शिक्षकों पर इतना बोझ नहीं डाला जाना चाहिए
Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) ड्यूटी में स्कूली शिक्षकों की तैनाती को लेकर चुनाव आयोग को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ कहा कि चुनावी काम के चक्कर में शिक्षकों पर इतना बोझ नहीं डाला जाना चाहिए कि वे तनाव में आ जाएं और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चुनाव आयोग से उनकी संवेदनशीलता पर सवाल किए।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने चुनाव आयोग से पूछा कि क्या वह संविधान के अनुच्छेद 324 की शक्तियों का इस्तेमाल करके जो चाहे कर सकता है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि शिक्षकों को भी आराम करने का हक है और ऐसी चुनावी ड्यूटी नहीं होनी चाहिए जो उन्हें रुला दे। अदालत ने निर्देश दिया कि चुनावी जिम्मेदारियों और छात्रों की शिक्षा के बीच एक सही संतुलन बनाया जाए ताकि शिक्षा के अधिकार (RTE) का उल्लंघन न हो।
दूसरी तरफ चुनाव आयोग की ओर से वकील संजय वशिष्ठ ने दलील दी कि SIR का काम लगभग पूरा हो चुका है और केवल 10 से 14 प्रतिशत शिक्षकों को ही इस काम में लगाया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि यह काम अक्सर छुट्टियों या स्कूल के समय के बाद किया जाता है और इसके लिए शिक्षकों को मानदेय और मुआवजा भी दिया जाता है।
हालांकि हाईकोर्ट ने इस तर्क को पूरी तरह नहीं माना और कहा कि अगर आयोग कर्मचारियों को स्वयंसेवक कहता है, तब भी उनके पास इस ड्यूटी को मना करने का कोई विकल्प नहीं होता। काम न करने पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है, जिससे उन पर मानसिक दबाव बढ़ता है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि ट्रेनिंग और घर-घर जाकर सत्यापन जैसे कामों की वजह से स्कूलों में पढ़ाई का काफी नुकसान होता है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त 2026 को होगी, जिसमें चुनाव आयोग को अपना हलफनामा दाखिल करना है।