Delhi High Court ने Sugar Free उत्पादों पर मांगा जवाब, Artificial Sweeteners के स्वास्थ्य जोखिमों पर केंद्र और FSSAI को नोटिस

Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने शुगर-फ्री उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले कृत्रिम स्वीटनर्स (Artificial Sweeteners) से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों पर चिंता जताई है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं म

Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने शुगर-फ्री उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले कृत्रिम स्वीटनर्स (Artificial Sweeteners) से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों पर चिंता जताई है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह कदम एक जनहित याचिका (PIL) के बाद उठाया गया है, जिसमें इन उत्पादों से होने वाले नुकसान का दावा किया गया है।

यह याचिका इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) द्वारा दायर की गई है। याचिका में WHO और IARC जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। इन रिपोर्टों में कहा गया है कि लंबे समय तक कृत्रिम मिठास का सेवन करने से कैंसर का खतरा, हृदय संबंधी बीमारियां, मेटाबॉलिक विकार और तंत्रिका तंत्र पर बुरा असर पड़ सकता है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि खाद्य सुरक्षा नियमों को सख्त बनाया जाए और उपभोक्ताओं को उत्पादों पर स्पष्ट चेतावनी दी जाए।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि यह मुद्दा हम सभी से जुड़ा हुआ है। कोर्ट ने केंद्र सरकार और FSSAI को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर, 2026 को होगी। याचिका में यह भी मांग की गई है कि भारत के लिए अलग से स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययन कराए जाएं ताकि स्थानीय स्तर पर इसके प्रभावों को समझा जा सके।

फिलहाल कोर्ट ने कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया है, इसलिए कंपनियां इन उत्पादों को बाजार में बेचने और उनका विज्ञापन करने का काम जारी रख सकती हैं। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव और अंकुर छिब्बर पैरवी कर रहे हैं। मुख्य रूप से FSSAI से पैकेजिंग, लेबलिंग और मार्केटिंग के लिए सख्त नियम लागू करने की मांग की गई है ताकि आम जनता को भ्रामक दावों से बचाया जा सके।