Delhi: एंबेसडर होटल को मिले बेदखली का नोटिस, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और L&DO से मांगा जवाब

Delhi: दिल्ली के मशहूर एंबेसडर होटल को खाली करने के नोटिस पर अब कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने दोनों पक्षों

Delhi: दिल्ली के मशहूर एंबेसडर होटल को खाली करने के नोटिस पर अब कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने दोनों पक्षों से तीन हफ्ते के भीतर इस पूरे मामले पर जवाब मांगा है।

पूरा मामला यह है कि L&DO के एस्टेट ऑफिसर ने 11 जून 2026 को पब्लिक प्रिमाइसेस एक्ट के तहत होटल को बेदखली का ‘कारण बताओ नोटिस’ भेजा था। इसके खिलाफ होटल प्रबंधन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। होटल का कहना है कि एस्टेट ऑफिसर के पास इस मामले में कार्रवाई करने का कानूनी अधिकार नहीं है। होटल प्रबंधन ने दावा किया कि वे 1943 से इस संपत्ति पर काबिज हैं और उनके पास 8 अक्टूबर 1945 का एक रजिस्टर्ड लीज समझौता भी है।

गुरुवार 9 जुलाई 2026 को जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने होटल की उस मांग को खारिज कर दिया जिसमें एस्टेट ऑफिसर की कार्यवाही पर रोक लगाने की बात कही गई थी। जस्टिस शंकर ने साफ किया कि एस्टेट ऑफिसर एक वैधानिक अधिकारी हैं और वे कानून के मुताबिक ही फैसला लेंगे। होटल की तरफ से वकील सुधीर नंद्राजोग ने डर जताया कि बिना आपत्तियों की सुनवाई किए कोई सख्त आदेश पारित हो सकता है, जबकि केंद्र सरकार के वकील आशीष दीक्षित ने इस याचिका का विरोध किया और इसे सुनवाई योग्य नहीं बताया।

यह विवाद काफी पुराना है और 1960 से चला आ रहा है। होटल ने तीस हजारी कोर्ट के उस फैसले को भी चुनौती दी है जिसमें जिला जज ने केंद्र सरकार की अपील को सही माना था। इससे पहले 2009 में एक आदेश आया था जिसमें होटल के निर्माण को वैध बताया गया था। अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में 17 अगस्त 2026 को होगी।