Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक तीन साल की बच्ची, बेबी संस्कृति भगत (सांची) के इलाज के लिए केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। बच्ची एक बहुत ही दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी LRBA की कमी से पीड़ित है, जिससे उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता खत
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक तीन साल की बच्ची, बेबी संस्कृति भगत (सांची) के इलाज के लिए केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। बच्ची एक बहुत ही दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी LRBA की कमी से पीड़ित है, जिससे उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म हो रही है। परिवार ने कोर्ट से गुजारिश की है कि बच्ची की जान बचाने के लिए जरूरी फंड बिना देरी के जारी किया जाए।
बच्ची को क्या बीमारी है और इलाज का क्या तरीका है?
बेबी संस्कृति भगत LRBA (लिपोपॉलीसेकेराइड-रिस्पॉन्सिव बेज-लाइक एंकर प्रोटीन) नाम की दुर्लभ बीमारी से जूझ रही है। 2025 में हुए होल जीनोम टेस्ट से इस बीमारी की पुष्टि हुई थी। डॉक्टरों के मुताबिक इस बीमारी का एकमात्र इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांट है। AIIMS दिल्ली ने अप्रैल 2026 में यह साफ कर दिया था कि उनके पास इस विशेष उपचार के लिए जरूरी सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।
कोर्ट में क्या मांग की गई और क्या है सरकारी नियम?
बच्ची के पिता ने याचिका के जरिए मांग की है कि केंद्र सरकार बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए 40 लाख रुपये की राशि सीधे चेन्नई के अपोलो अस्पताल को दे। परिवार ‘दुर्लभ बीमारियों के लिए राष्ट्रीय नीति, 2021’ के तहत मदद मांग रहा है। इस नीति में पहले मदद की सीमा 20 लाख रुपये थी, जिसे 2022 में बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया था। परिवार का कहना है कि समय पर इलाज न मिलना उनके जीने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
अब आगे की कानूनी कार्यवाही क्या होगी?
जस्टिस अमित शर्मा ने कोर्ट की छुट्टियों के दौरान सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश लेने के लिए समय दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 8 जून, 2026 को वेकेशन बेंच के सामने होगी। परिवार ने 1 जून, 2026 को फंड के लिए आवेदन किया था, लेकिन अभी तक सरकार की तरफ से कोई फैसला नहीं आया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बेबी संस्कृति भगत को कौन सी बीमारी है और इलाज कहाँ होना है?
बच्ची LRBA नाम की दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित है। इसका इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांट के जरिए चेन्नई के अपोलो अस्पताल में होना प्रस्तावित है।
दुर्लभ बीमारियों के लिए सरकारी नीति के तहत कितनी वित्तीय सहायता मिलती है?
दुर्लभ बीमारियों के लिए राष्ट्रीय नीति, 2021 के तहत पहले 20 लाख रुपये तक की मदद मिलती थी, जिसे स्वास्थ्य मंत्रालय ने बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया है।