Delhi में छात्रों पर पुलिस बर्बरता मामला, हाई कोर्ट सख्त; केंद्र और दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब
Delhi: राजधानी दिल्ली में ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान छात्रों और युवाओं के साथ हुई पुलिसिया बर्बरता के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस घटना को लेकर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को
Delhi: राजधानी दिल्ली में ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान छात्रों और युवाओं के साथ हुई पुलिसिया बर्बरता के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस घटना को लेकर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर चार हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
मामला 20 जुलाई 2026 को हुए एक प्रदर्शन से जुड़ा है, जहां NEET परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) से जुड़े छात्र प्रदर्शन कर रहे थे। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील एन. हरिहरन, विकास सिंह और गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि पुलिस ने महिलाओं और बच्चों सहित प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से ज्यादा ताकत का इस्तेमाल किया। वकीलों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने कीलों वाली लाठियों और इलेक्ट्रिक बैटन का प्रयोग किया, जिससे 90 से ज्यादा लोग घायल हुए और कुछ महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी भी हुई।
चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने स्पष्ट किया कि पुलिस की ज्यादतियों के खिलाफ जनहित याचिका (PIL) को सिर्फ इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता क्योंकि लोगों ने अलग से FIR दर्ज नहीं कराई है। कोर्ट ने इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार सभी सबूतों को सुरक्षित रखें, जिसमें CCTV फुटेज, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग और अन्य वीडियो शामिल हैं।
दूसरी तरफ, केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने दलील दी कि ये याचिकाएं सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित हैं और इन्हें स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। दिल्ली पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, पत्थरबाजी और तोड़फोड़ के मामले में कम से कम नौ FIR दर्ज की गई हैं। इस बीच, एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की ‘गलत तरीके से हिरासत’ से जुड़ी एक याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया, क्योंकि उनके परिवार ने इस मुद्दे पर संतोष जताया था।