Delhi High Court में वन्यजीव संरक्षण को लेकर याचिका, केंद्र सरकार और NBWL को नोटिस जारी
Delhi: देश के वन्यजीवों की रक्षा करने वाली सबसे बड़ी संस्था National Board for Wildlife (NBWL) के कामकाज पर अब दिल्ली हाई कोर्ट में सवाल खड़े हुए हैं। पूर्व वन अधिकारियों और संरक्षणवादियों के एक समूह ने कोर्ट में याचिका
Delhi: देश के वन्यजीवों की रक्षा करने वाली सबसे बड़ी संस्था National Board for Wildlife (NBWL) के कामकाज पर अब दिल्ली हाई कोर्ट में सवाल खड़े हुए हैं। पूर्व वन अधिकारियों और संरक्षणवादियों के एक समूह ने कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि यह संस्था अब वन्यजीवों को बचाने के बजाय संरक्षित क्षेत्रों को सड़क, खनन और उद्योगों के लिए खाली कराने का जरिया बन गई है।
बुधवार, 8 जुलाई 2026 को इस जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस डी. के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने केंद्र सरकार और NBWL को औपचारिक नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और NBWL को निर्देश दिया है कि वे अगली सुनवाई तक अपना विस्तृत जवाब दाखिल करें। इस मामले की अगली सुनवाई सितंबर में होगी।
याचिका दायर करने वालों में रिटायर्ड IFS अधिकारी प्रकृति श्रीवास्तव और संरक्षणवादी एम.के. रंजीतसिंह जैसे 10 लोग शामिल हैं। इनका कहना है कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत NBWL की जिम्मेदारी जंगलों और जानवरों को बचाना है, लेकिन इसकी स्टैंडिंग कमेटी (SC-NBWL) ने 2014 से 2026 के बीच संरक्षित जमीनों को हटाने या कम करने के 97% से ज्यादा प्रस्तावों को मंजूरी दे दी।
याचिका में यह गंभीर बात कही गई है कि स्टैंडिंग कमेटी एक ‘क्लियरिंग हाउस’ की तरह काम कर रही है, जहाँ एक ही दिन में 100 से ज्यादा विकास परियोजनाओं को बिना किसी वैज्ञानिक जांच या पारदर्शिता के मंजूरी दे दी जाती है। साथ ही, नियमों के मुताबिक NBWL की बैठक साल में एक बार होनी चाहिए, लेकिन आरोप है कि यह बोर्ड 13 साल तक नहीं मिला और आखिरकार 2025 में इसकी बैठक हुई।