Delhi: राजधानी की मुख्य सड़कों पर खड़ी लावारिस और जब्त गाड़ियों के ढेर ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इन गाड़ियों को ‘कारों का कब्रिस्तान’ बताते हुए दिल्ली सरकार और पुलिस के खिलाफ सख्त रुख
Delhi: राजधानी की मुख्य सड़कों पर खड़ी लावारिस और जब्त गाड़ियों के ढेर ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इन गाड़ियों को ‘कारों का कब्रिस्तान’ बताते हुए दिल्ली सरकार और पुलिस के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि इन गाड़ियों की वजह से सड़कों पर भारी जाम लग रहा है और आम जनता को काफी परेशानी हो रही है।
कोर्ट ने पुलिस और प्रशासन से क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि पुलिस थानों के आसपास गाड़ियों के ढेर लग गए हैं, जिससे थानों तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि वे सभी थाना प्रभारियों (SHOs) से नियमित स्टेटस रिपोर्ट मांगें। साथ ही, कमिश्नर को इस बात का हलफनामा देना होगा कि इन गाड़ियों को हटाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
आम जनता को होने वाली परेशानियां क्या हैं?
जन सेवा वेलफेयर सोसायटी द्वारा दायर याचिका में बताया गया कि इन गाड़ियों के कारण शहर में कई समस्याएं पैदा हो रही हैं:
- सड़कों की चौड़ाई कम होने से ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ गई है।
- गाड़ियों के नीचे पानी जमा होने से मच्छर पनप रहे हैं, जिससे बीमारियों का खतरा है।
- फुटपाथ ब्लॉक होने से पैदल चलने वालों और सफाई कर्मचारियों को दिक्कत होती है।
- परिवहन विभाग आम लोगों पर पुरानी गाड़ी पार्क करने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाता है, जबकि पुलिस की जब्त गाड़ियां सालों तक सड़कों पर खड़ी रहती हैं।
अब आगे क्या होगा?
अदालत ने पाया कि परिवहन विभाग ने फरवरी 2024 में इन वाहनों को हटाने के लिए जो गाइडलाइन्स जारी की थीं, उन्हें सही से लागू नहीं किया गया। अब कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को पुलिस स्टेशनों के पास से इन वाहनों को तुरंत हटाने और इसकी रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। पुलिस कमिश्नर अब इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे ताकि सड़कों को खाली कराया जा सके।