Delhi में नालों में कचरा फेंकने वालों की अब खैर नहीं, हाईकोर्ट ने MCD को जुर्माना 5,000 रुपये तक बढ़ाने को कहा
Delhi: दिल्ली में मानसून के दौरान होने वाले जलभराव और जाम नालों की समस्या को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कहा है कि लोग अपनी नागरिक जिम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं, जिससे बारिश में शहर की हालत खर
Delhi: दिल्ली में मानसून के दौरान होने वाले जलभराव और जाम नालों की समस्या को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कहा है कि लोग अपनी नागरिक जिम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं, जिससे बारिश में शहर की हालत खराब हो जाती है। कोर्ट ने MCD को निर्देश दिया है कि कचरा फेंकने वालों पर लगने वाले जुर्माने को बढ़ाया जाए और लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाए।
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ ने मंगलवार, 30 जून 2026 को यह निर्देश दिए। फिलहाल नालों में कूड़ा फेंकने पर 500 रुपये का जुर्माना लगता है, जिसे कोर्ट ने बढ़ाकर 5,000 रुपये तक करने का सुझाव दिया है। MCD को अब इस बारे में एक प्रस्ताव तैयार कर अधिकारियों को भेजना होगा। अदालत ने वियतनाम जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अनुशासन की वजह से भारी बारिश के बाद भी ऐसी समस्याएं नहीं होती हैं।
कोर्ट ने केवल जुर्माने की बात नहीं की, बल्कि जमीन पर काम करने के लिए पुलिस बीट कांस्टेबलों को भी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके इलाके में कोई नालों में कचरा न फेंके। साथ ही, MCD और दिल्ली जल बोर्ड (DJB) को आपस में तालमेल बिठाकर सीवेज पॉइंट्स को बंद करने और तूफान के पानी के नालों को साफ रखने को कहा गया है।
नालों के रखरखाव के लिए एक नया सिस्टम भी लागू किया जा रहा है। खुले नालों को पत्थर की स्लैब से कवर किया जा रहा है और एक बार काम पूरा होने के बाद इनकी देखरेख की जिम्मेदारी स्थानीय रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) की होगी। रोहतक रोड के एक नाले के काम को पूरा करने के लिए अधिकारियों को दो हफ्ते का समय मिला है ताकि मानसून से पहले काम खत्म हो सके। इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी।