Delhi High Court में वकीलों की हड़ताल खत्म, कल से दोबारा शुरू होगा काम
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट के वकीलों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली है। अब शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 से सभी वकील दोबारा कोर्ट में पेश होंगे और काम शुरू करेंगे। यह फैसला दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय के भरो
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट के वकीलों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली है। अब शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 से सभी वकील दोबारा कोर्ट में पेश होंगे और काम शुरू करेंगे। यह फैसला दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय के भरोसे और केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के साथ हुई बैठक के बाद लिया गया है।
दरअसल, यह पूरा विवाद जिला अदालतों के आर्थिक अधिकार क्षेत्र (pecuniary jurisdiction) को बढ़ाने के प्रस्ताव पर शुरू हुआ था। हाई कोर्ट ने जिला अदालतों की सीमा को 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने की सिफारिश की थी। दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) इसका विरोध कर रहा था। वकीलों का मानना था कि इससे बड़ी रकम वाले सिविल और कमर्शियल केस हाई कोर्ट से हटकर जिला अदालतों में चले जाएंगे, जिससे उनकी रोजी-रोटी और न्याय प्रणाली पर असर पड़ेगा।
इस मुद्दे पर 14 जुलाई से वकीलों ने काम करना बंद कर दिया था। हालांकि, चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने DHCBA की एग्जीक्यूटिव कमेटी को अपना पक्ष रखने के लिए आवेदन देने को कहा और भरोसा दिलाया कि उनकी चिंताओं पर गौर किया जाएगा। वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने यह भी साफ किया कि आर्थिक सीमा में बदलाव केवल संसद ही कर सकती है, क्योंकि यह दिल्ली हाई कोर्ट एक्ट, 1966 के तहत आता है।
दिलचस्प बात यह है कि जहां हाई कोर्ट के वकील इसका विरोध कर रहे थे, वहीं दिल्ली की सभी जिला अदालतों के बार एसोसिएशन की कोऑर्डिनेशन कमेटी ने इस फैसले का स्वागत किया। उनका कहना है कि यह एक ऐतिहासिक कदम है और वे इस सीमा को 20 करोड़ रुपये या उससे भी ज्यादा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों की वजह से अब छोटे-मोटे विवाद भी हाई कोर्ट पहुंच रहे हैं, इसलिए जिला अदालतों की सीमा बढ़ाना जरूरी है।
DHCBA ने साफ किया है कि उन्होंने फिलहाल के लिए हड़ताल स्थगित की है, लेकिन वे इस प्रस्ताव का विरोध जारी रखेंगे और अपनी बात सरकार तक पहुंचाते रहेंगे।