Delhi High Court में वकीलों की हड़ताल, जिला अदालतों के अधिकार बढ़ाने के प्रस्ताव पर जताया विरोध
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट के वकीलों ने अदालत के एक नए प्रस्ताव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने 14 जुलाई 2026 को न्यायिक काम से पूरी तरह दूरी बनाने का फैसला किया है। यह विरोध जिला अदालत
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट के वकीलों ने अदालत के एक नए प्रस्ताव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने 14 जुलाई 2026 को न्यायिक काम से पूरी तरह दूरी बनाने का फैसला किया है। यह विरोध जिला अदालतों के आर्थिक अधिकार क्षेत्र (pecuniary jurisdiction) को बढ़ाने की सिफारिश के बाद शुरू हुआ है।
मामला यह है कि दिल्ली हाई कोर्ट की फुल कोर्ट ने जिला अदालतों की सीमा को 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने की सिफारिश की है। अभी के नियम के मुताबिक, 2 करोड़ रुपये से ज्यादा के सिविल विवाद हाई कोर्ट में जाते हैं और इससे कम के मामले जिला अदालतों में सुने जाते हैं। DHCBA का कहना है कि अगर यह बदलाव हुआ, तो हाई कोर्ट के पास आने वाले लगभग 70 प्रतिशत मामले कम हो जाएंगे, जिससे कई वकीलों की रोजी-रोटी और प्रैक्टिस पर बुरा असर पड़ेगा।
वकीलों का यह भी मानना है कि आर्थिक सीमा बढ़ाने का अधिकार केवल विधायिका (legislature) के पास है और हाई कोर्ट इसे अकेले नहीं बदल सकता। दूसरी तरफ, जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस तेजस करिया जैसे न्यायाधीशों ने इस बदलाव का समर्थन किया है। उनका कहना है कि दिल्ली में प्रॉपर्टी की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि छोटे घर भी 2 करोड़ से ऊपर के हैं, जिसकी वजह से लोगों को मजबूरी में हाई कोर्ट जाना पड़ता है। इससे आम जनता का खर्च और परेशानी बढ़ती है।
इस विवाद में अलग-अलग गुटों की राय बंटी हुई है। जहाँ हाई कोर्ट के वकील इसका विरोध कर रहे हैं, वहीं दिल्ली की सभी जिला अदालतों के बार एसोसिएशन की कोऑर्डिनेशन कमेटी ने इस सिफारिश का स्वागत किया है। जिला अदालतों के वकीलों का कहना है कि इससे आम नागरिकों को अपने इलाके में ही न्याय मिलेगा और मामले जल्दी निपटेंगे। वे तो इस सीमा को 20 करोड़ रुपये या उससे भी ज्यादा करने की मांग कर रहे हैं।