Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान जस्टिस तेजस कारिया ने खुद को इस केस से अलग कर लिया है। यह मामला पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के कई नेताओं पर कोर्ट की कार्यवाही
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान जस्टिस तेजस कारिया ने खुद को इस केस से अलग कर लिया है। यह मामला पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के कई नेताओं पर कोर्ट की कार्यवाही का वीडियो सोशल मीडिया पर डालने के आरोपों से जुड़ा है। अब इस मामले की सुनवाई गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 को एक दूसरी बेंच करेगी।
क्या है पूरा मामला और क्यों हुई शिकायत
यह विवाद 13 अप्रैल को शुरू हुआ जब अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वरना कांता शर्मा की अदालत में अपनी याचिका पर बहस की थी। आरोप है कि इस कार्यवाही की अनधिकृत वीडियो रिकॉर्डिंग की गई और उसे वायरल किया गया। वकील वैभव सिंह ने PIL दाखिल कर कहा है कि यह न्यायपालिका की छवि खराब करने की एक सोची-समझी साजिश है। याचिका में मांग की गई है कि दोषियों के खिलाफ अवमानना (Contempt) की कार्यवाही की जाए।
किन-किन लोगों के नाम हैं इस याचिका में
इस PIL में सिर्फ अरविंद केजरीवाल ही नहीं, बल्कि कई बड़े नाम शामिल हैं। इसमें AAP के नेताओं के साथ-साथ कुछ पत्रकारों और अन्य नेताओं को भी नामजद किया गया है।
- AAP नेता: मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, संजीव झा, पुनरदीप साहनी, जरनैल सिंह, मुकेश अहलावत और विनय मिश्रा।
- अन्य नाम: पत्रकार रवीश कुमार और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह।
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म: Meta (Facebook, Instagram), Google (YouTube) और X Corp से वीडियो हटाने की मांग की गई है।
कोर्ट के नियम क्या कहते हैं
दिल्ली हाई कोर्ट के नियमों के मुताबिक, बिना अनुमति के कोर्ट की कार्यवाही को रिकॉर्ड करना या शेयर करना कानूनी अपराध है। इस मामले में निम्नलिखित नियमों का हवाला दिया गया है:
| नियम/एक्ट |
मुख्य बात |
| Live Streaming Rules 2022 |
अनधिकृत रिकॉर्डिंग और प्रसार पर पूरी तरह रोक है। |
| Electronic Evidence Rules 2025 |
बिना कोर्ट की अनुमति के वीडियो पब्लिश करना मना है। |
| कानूनी धाराएं |
Copyright Act 1957 और IT Act 2000 के तहत कार्रवाई हो सकती है। |