Delhi: जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन की वीडियोग्राफी पर विवाद, हाई कोर्ट में केंद्र ने दी सफाई

Delhi: राजधानी के जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों की वीडियोग्राफी को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट में इस बात पर बहस चली कि क्या पुलिस प्रदर्शनकारियों की जासूसी कर रही है। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल त

Delhi: राजधानी के जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों की वीडियोग्राफी को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट में इस बात पर बहस चली कि क्या पुलिस प्रदर्शनकारियों की जासूसी कर रही है। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि यह सब कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया जा रहा है।

यह पूरा मामला एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है, जिसे पूर्व JNUSU अध्यक्ष ऐशे घोष ने दायर किया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि जंतर मंतर पर छात्र प्रदर्शनकारियों की लगातार और दखल देने वाली निगरानी की जा रही है। इस पर जवाब देते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जंतर मंतर पर वीडियोग्राफी एक स्टैंडर्ड सुरक्षा प्रक्रिया है और इसका मकसद जासूसी करना नहीं है। उन्होंने इस याचिका को ‘लक्जरी लिटिगेशन’ भी बताया।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि क्या उन्होंने विरोध प्रदर्शनों को संभालने के लिए कोई SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार किया है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 2018 के मजदूर किसान शक्ति संगठन मामले के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया, जिसमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और उसे रेगुलेट करने के नियमों के बारे में बताया गया है।

जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के नियमों में जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या 1,000 तक सीमित रखी गई है। साथ ही, डिजिटल स्काई मैप के अनुसार जंतर मंतर ‘रेड जोन’ में आता है, इसलिए यहाँ बिना सरकारी अनुमति के ड्रोन उड़ाना मना है और ऐसा करने पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

इस मामले में हालिया घटनाक्रम यह रहा कि जून 2026 से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) यहाँ प्रदर्शन कर रही है। साथ ही, जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को 21 दिनों की भूख हड़ताल के बाद सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था। हाई कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को तय की है।