Delhi High Court में IVF विवाद, पति ने वापस ली सहमति तो पत्नी ने एम्ब्रियो सुरक्षित रखने के लिए खटखटाया दरवाजा

Delhi: एक महिला ने मां बनने की अपनी आखिरी उम्मीद को बचाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामला तब शुरू हुआ जब IVF प्रक्रिया के बीच में पति ने अपनी सहमति वापस ले ली। अब पत्नी ने अदालत से मांग की है कि उनके

Delhi: एक महिला ने मां बनने की अपनी आखिरी उम्मीद को बचाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामला तब शुरू हुआ जब IVF प्रक्रिया के बीच में पति ने अपनी सहमति वापस ले ली। अब पत्नी ने अदालत से मांग की है कि उनके एम्ब्रियो (embryos) को सुरक्षित रखा जाए ताकि भविष्य में वह मां बन सके।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच इस याचिका पर सुनवाई कर रही है। अदालत ने इस मामले में नोटिस जारी कर सभी संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। पत्नी की तरफ से एडवोकेट भारत चुघ पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने कोर्ट में दलील दी कि महिला की उम्र और मेडिकल कंडीशन को देखते हुए ये एम्ब्रियो ही उनके जैविक मां बनने का आखिरी मौका हैं, इसलिए कोर्ट के अंतिम फैसले तक इन्हें सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

यह पूरा मामला मातृत्व के अधिकार और सहमति के कानूनी संतुलन के बीच फंसा हुआ है। भारत में IVF प्रक्रियाओं को Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act, 2021 (ART Act) के तहत रेगुलेट किया जाता है। इस कानून की धारा 22 के मुताबिक, शादी के दौरान बनाए गए एम्ब्रियो के इस्तेमाल के लिए पति-पत्नी दोनों की सहमति जरूरी होती है।

इसी बीच National Commission for Women (NCW) ने भी पूर्व जज आशा मेनन की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई है। यह कमेटी ART एक्ट 2021 और सरोगेसी रेगुलेशन एक्ट 2021 जैसे कानूनों की समीक्षा करेगी ताकि IVF क्लीनिकों और सेंटर्स के लिए बेहतर नियम बनाए जा सकें।

इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने ऐसे कई मामलों पर अलग-अलग फैसले दिए हैं। अप्रैल 2026 में कोर्ट ने एक महिला को उसके कोमा में गए पति के स्पर्म का इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी। वहीं जून 2026 में 50 साल की एक महिला को उसके पुराने एम्ब्रियो इस्तेमाल करने की इजाजत मिली थी। हालांकि, मार्च 2026 में कोर्ट ने बिना पति की सहमति के एम्ब्रियो इम्प्लांट करने की एक याचिका को खारिज कर दिया था। अब कोर्ट यह तय करेगा कि इस मामले में महिला का मातृत्व अधिकार बड़ा है या पति का सहमति वापस लेने का हक।