Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने हॉकी इंडिया के महासचिव भोला नाथ सिंह को अदालत की अवमानना का दोषी पाया है। न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने 20 अप्रैल, 2026 को यह फैसला सुनाया। कोर्ट के आदेश को मानने के बजाय उसकी अनदेखी करन
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने हॉकी इंडिया के महासचिव भोला नाथ सिंह को अदालत की अवमानना का दोषी पाया है। न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने 20 अप्रैल, 2026 को यह फैसला सुनाया। कोर्ट के आदेश को मानने के बजाय उसकी अनदेखी करने के मामले में अब 4 मई, 2026 को सजा तय की जाएगी।
क्या था पूरा मामला और क्यों हुई अवमानना?
यह विवाद निर्वाचित उपाध्यक्ष सैयद आसिमा अली को लेकर शुरू हुआ था। कोर्ट ने 17 जनवरी, 2025 को आदेश दिया था कि हॉकी इंडिया उन्हें डिजिटल लिंक के जरिए कार्यकारी बोर्ड की सभी बैठकों में शामिल होने दे। लेकिन भोला नाथ सिंह ने इस आदेश को नजरअंदाज किया और 4 जुलाई व 27 जुलाई, 2025 की महत्वपूर्ण बैठकों से आसिमा अली को बाहर रखा गया।
अदालत ने भोला नाथ सिंह की माफी पर क्या कहा?
भोला नाथ सिंह ने अदालत में बिना शर्त माफी मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। न्यायमूर्ति कौरव ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह माफी गंगा के पवित्र जल की तरह नहीं है जो जानबूझकर की गई गलती को धो सके। कोर्ट ने इसे एक सुनियोजित अवहेलना माना क्योंकि शुरुआत में कोई माफी नहीं मांगी गई थी और न ही गलती सुधारने की कोशिश की गई थी।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी और आगे की कार्रवाई
अदालत ने हॉकी इंडिया और उसके महासचिव के व्यवहार को प्रशासनिक पाप बताया। कोर्ट ने कहा कि एक राष्ट्रीय खेल महासंघ जो सरकारी पैसे से चलता है, उसका ऐसा आचरण सही नहीं है। फिलहाल, कोर्ट ने भोला नाथ सिंह को 4 मई की सुनवाई से पहले सुधारात्मक कदम उठाकर अपनी गलती सुधारने का मौका दिया है।