Delhi में जंतर मंतर के पास इंटरनेट बंद करने के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती, आज होगी सुनवाई

Delhi: राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर इलाके में मोबाइल इंटरनेट बंद किए जाने के सरकारी आदेश के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच इस मामले

Delhi: राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर इलाके में मोबाइल इंटरनेट बंद किए जाने के सरकारी आदेश के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच इस मामले की सुनवाई आज दोपहर 2:30 बजे करेगी। कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे अर्जेंट लिस्टिंग में शामिल किया है।

यह पूरा विवाद गुरुवार, 23 जुलाई 2026 को केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक आदेश से शुरू हुआ। इस आदेश के तहत जंतर मंतर के 1.5 किलोमीटर के दायरे में शाम 4 बजे से आधी रात तक मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद करने को कहा गया था। इसका असर सिर्फ विरोध प्रदर्शन वाली जगह पर ही नहीं, बल्कि मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन तक महसूस किया गया। हालत यह थी कि कनॉट प्लेस के दुकानदारों, ऑफिसों और रेस्टोरेंट्स को भी शाम 6:30 बजे तक बंद करने की सलाह दी गई, जिससे वहां के व्यापार पर असर पड़ा।

जंतर मंतर पर Cockroach Janta Party (CJP) के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि NEET पेपर लीक और CBSE की मार्किंग में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें और परीक्षाओं के सिस्टम में सुधार किया जाए। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंसाल्वेस पैरवी करेंगे।

इसी बीच, दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अन्य याचिका पर केंद्र और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। यह याचिका छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस द्वारा की गई सख्ती और कथित तौर पर गलत व्यवहार की SIT जांच की मांग को लेकर थी। कोर्ट ने कहा कि यह कोई अकेली घटना नहीं है और पुलिस को सभी CCTV फुटेज और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने 20 जुलाई की मार्च के दौरान पुलिस बर्बरता के आरोपों वाली एक याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है।