Delhi में जंतर मंतर के पास इंटरनेट बंद करने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती, शुक्रवार को होगी सुनवाई

Delhi: राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर इलाके में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को बंद किए जाने के सरकारी आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 को

Delhi: राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर इलाके में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को बंद किए जाने के सरकारी आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 को इस पर सुनवाई करने का फैसला किया है। यह याचिका इंटरनेट बंदी को असंवैधानिक और मनमाना बताते हुए इसे रद्द करने की मांग करती है।

यह याचिका Software Freedom Law Centre (SFLC.In) की तरफ से दाखिल की गई है। इसमें गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा 17 जुलाई से 23 जुलाई 2026 के बीच जारी किए गए छह अलग-अलग आदेशों को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि सरकार ने बिना किसी ठोस वजह के इंटरनेट बंद किया है, जिससे लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ है। सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंसाल्वेस ने इस मामले को जल्द सुनने के लिए कोर्ट से आग्रह किया था।

जानकारी के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने जंतर मंतर के 1.5 किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट बंद करने का आदेश दिया था। सरकार ने इसके पीछे सार्वजनिक सुरक्षा और किसी भी आपातकालीन स्थिति से बचने का तर्क दिया है। सरकार का कहना है कि यह कदम अपराध को बढ़ावा देने वाली बातों को रोकने के लिए उठाया गया। वहीं, याचिका में दावा किया गया है कि इन आदेशों में केवल कानूनी शब्दों का इस्तेमाल किया गया है और यह नहीं बताया गया कि पूरा इंटरनेट बंद करना क्यों जरूरी था।

इस पूरे विवाद की जड़ जंतर मंतर पर चल रहा विरोध प्रदर्शन है। Cockroach Janta Party (CJP) और कुछ छात्र NEET पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। याचिका में यह भी मांग की गई है कि भविष्य में इंटरनेट बंद करने के सभी आदेशों को सार्वजनिक किया जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।